Fri, 09 18, 2026
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2027 से कारों के लिए बदलेंगे माइलेज और प्रदूषण के नियम, EV-हाइब्रिड को मिलेगा फायदा; पेट्रोल-डीजल कारों पर बढ़ सकता है खर्च:

नई पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी

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केंद्र सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE) मानकों का ड्राफ्ट जारी किया है। प्रस्तावित नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इनका उद्देश्य कारों की ईंधन दक्षता बढ़ाने, पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने और वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।

नई व्यवस्था में इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और ज्यादा एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाली कारों को कंपनियों के औसत प्रदर्शन में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। वहीं ज्यादा ईंधन खपत और उत्सर्जन वाले वाहनों के कारण कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

EV और हाइब्रिड कारों को मिलेगा सुपर क्रेडिट

नई नीति में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को सुपर क्रेडिट देने का प्रावधान है। एक इलेक्ट्रिक कार को कंपनियों के औसत की गणना में 3 कारों के बराबर माना जाएगा, जबकि एक हाइब्रिड कार को 1.6 कारों के बराबर गिना जाएगा।

इससे कंपनियों के लिए अपने निर्धारित उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करना आसान होगा। ऐसे में कंपनियां EV और हाइब्रिड मॉडल की बिक्री बढ़ाने के लिए कीमतों और ऑफर्स में बदलाव कर सकती हैं।

ज्यादा प्रदूषण वाली कारें पड़ सकती हैं महंगी

कम माइलेज और ज्यादा उत्सर्जन वाली कारें कंपनियों के लिए चुनौती बनेंगी। यदि किसी कंपनी का औसत उत्सर्जन निर्धारित सीमा से अधिक रहता है तो उसे अतिरिक्त क्रेडिट खरीदने पड़ सकते हैं।

प्रस्तावित व्यवस्था में इन क्रेडिट की कीमत 2,500 से 4,500 रुपए प्रति ग्राम CO₂ तक हो सकती है। कंपनियां इस अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा ज्यादा प्रदूषण वाले वाहनों की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों से वसूल सकती हैं।

इसका असर खास तौर पर ज्यादा ईंधन खपत वाले पेट्रोल और डीजल मॉडलों की कीमतों पर पड़ सकता है।

E85 और E100 कारों को भी फायदा

85 से 100 प्रतिशत तक एथेनॉल पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल कारों को भी नई नीति में प्रोत्साहन मिलेगा। ऐसी कारों को 22.3 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलेगा और एक फ्लेक्स-फ्यूल कार को कंपनियों की गणना में 1.1 कार के बराबर माना जाएगा।

वहीं E20 पेट्रोल पर चलने वाली कारों के मामले में भी कंपनियों को उत्सर्जन गणना में लाभ मिलेगा। प्रस्ताव के अनुसार E20 कार से संबंधित CO₂ उत्सर्जन को गणना में 8 प्रतिशत कम माना जाएगा।

E20 कारें सस्ती होंगी या महंगी?

E20 कारों की कीमत पर सीधा असर मॉडल और कंपनी की रणनीति पर निर्भर करेगा। नई नीति के तहत ईंधन दक्षता बढ़ाने वाली कुछ तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनमें बेहतर गियरबॉक्स, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और LED लाइटिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं।

इन तकनीकों के कारण कुछ वाहनों की शुरुआती लागत बढ़ सकती है, हालांकि बेहतर माइलेज से लंबे समय में ईंधन खर्च कम हो सकता है।

6-स्पीड गियरबॉक्स को मिलेगा बढ़ावा

नई नीति में 6 या उससे ज्यादा गियर वाले गियरबॉक्स को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। ज्यादा गियर इंजन को बेहतर दक्षता वाले RPM पर चलाने में मदद करते हैं और इससे ईंधन की खपत कम हो सकती है।

अब WLT P के आधार पर मापा जाएगा माइलेज

भारत मौजूदा MIDC टेस्टिंग सिस्टम से आगे बढ़कर वैश्विक मानकों के करीब WLTP व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। WLTP को वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों के ज्यादा करीब माना जाता है, इसलिए इससे वाहनों की ईंधन दक्षता की तुलना अधिक व्यावहारिक तरीके से हो सकेगी।

कंपनियों की होगी ‘पासबुक’

नई व्यवस्था में कंपनियों के प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखने के लिए एक तरह की ‘पासबुक’ व्यवस्था होगी। इसमें कंपनी के अच्छे प्रदर्शन पर क्रेडिट और लक्ष्य से खराब प्रदर्शन पर डेबिट दर्ज होगा।

इसके अलावा कंपनियों के बीच पूलिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। यानी बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनी अपने अतिरिक्त क्रेडिट का लाभ दूसरी कंपनी को दे या बेच सकेगी।

किन कंपनियों को छूट?

प्रस्तावित नियमों के अनुसार जिन कंपनियों की सालाना बिक्री 1,000 से कम यात्री कारें है, उन्हें इन मानकों से छूट दी जा सकती है।

पुरानी कारों पर नहीं पड़ेगा असर

इन नए नियमों का असर मौजूदा पुरानी कारों पर नहीं होगा। प्रस्तावित CAFE मानक 1 अप्रैल 2027 के बाद निर्मित या आयात की जाने वाली नई M1 श्रेणी की यात्री कारों पर लागू होंगे।

क्या डीजल कारें बंद हो जाएंगी?

नहीं। नई नीति में डीजल कारों को बंद करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, ज्यादा ईंधन खपत और उत्सर्जन के कारण डीजल मॉडल कंपनियों के लिए अपेक्षाकृत महंगे पड़ सकते हैं। क्रेडिट लागत से बचने के लिए कंपनियां इनके दाम बढ़ा सकती हैं या EV, हाइब्रिड और ज्यादा ईंधन दक्ष मॉडल पर ज्यादा जोर दे सकती हैं।

सरकार का बड़ा लक्ष्य

नई CAFE नीति का व्यापक उद्देश्य ईंधन की खपत कम करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना है।

यानी आने वाले वर्षों में कार बाजार में कंपनियों की रणनीति बदल सकती है। EV और हाइब्रिड वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल वाहनों में भी ज्यादा माइलेज और कम उत्सर्जन वाली तकनीकों पर जोर बढ़ने की संभावना है।

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