शिवाड़। द्वादश ज्योतिर्लिंग श्री घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सावन के प्रथम सोमवार और नागपंचमी के पावन अवसर पर आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगी विद्युत सज्जा से सुसज्जित मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। तड़के मंगला आरती के साथ दर्शन का क्रम शुरू हुआ, जो देर रात तक लगातार जारी रहा। मंदिर परिसर और मुख्य मार्गों पर दिनभर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
सवाई माधोपुर, टोंक, जयपुर, दौसा, लालसोट, करौली सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालु बाबा घुश्मेश्वर के दर्शन करने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। पूरा मंदिर परिसर "हर-हर महादेव", "बोल बम" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गूंजता रहा।
महाराष्ट्र से पहुंचे कांवड़ियों का हुआ अभिनंदन
रविवार रात महाराष्ट्र से 30 से 35 कांवड़िए घुश्मेश्वर धाम पहुंचे। उन्होंने अपने साथ लाए पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक किया। मंदिर ट्रस्ट ने सभी कांवड़ियों का दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया। विभिन्न क्षेत्रों से आए कांवड़ यात्रियों ने भी नदियों और सरोवरों से लाए जल से विधि-विधान के साथ जलाभिषेक किया।
नागपंचमी पर विशेष श्रृंगार बना आकर्षण
मंदिर पुजारी बब्लू पाराशर ने बताया कि सावन के प्रथम सोमवार और नागपंचमी के अवसर पर राजभोग के बाद भगवान घुश्मेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। शाम ढलते ही रोशनी से जगमगाता मंदिर दिव्य छटा बिखेरता नजर आया।
महिलाओं ने की सावन गोठ, भजन संध्या का आयोजन
घुश्मेश्वर उद्यान में महिलाओं ने पारंपरिक सावन गोठ का आयोजन कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की तथा अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। इस दौरान लोकगीत, शिव चालीसा और भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। वहीं लालसोट से आए जय बाबा भोलेनाथ मंडल ने रात्रि में विशाल भजन संध्या आयोजित की।
श्रद्धालुओं के लिए रहे विशेष प्रबंध
मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, छाया, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा और साफ-सफाई के व्यापक इंतजाम किए। ईसरदा रेलवे स्टेशन पर विशेष ट्रेनों के अस्थायी ठहराव से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे। देर रात तक मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहा।
