झुंझुनूं। केंद्र सरकार की आर्थिक एवं प्रशासनिक नीतियों, किसान-मजदूरों के अधिकारों और आगामी निकाय-पंचायत चुनावों को लेकर CPIML ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। किसान मजदूर भवन के उद्घाटन समारोह में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद राजाराम सिंह ने केंद्र की नीतियों की आलोचना की।
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजों ने देश को नुकसान पहुंचाया, उसी तरह केंद्र सरकार अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों के जरिए देश की खेती और किसानों को संकट में डाल रही है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर आदिवासियों को उनकी परंपरा, जल-जंगल-जमीन और पहचान से दूर कर धर्म के आधार पर बांटने का आरोप लगाया।
उन्होंने लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और शिक्षा के बाजारीकरण को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। मनरेगा का उदाहरण देते हुए कहा कि पंचायतों के अधिकार लगातार केंद्र के हाथों में केंद्रित किए जा रहे हैं।
खेती और किसान को नीलाम नहीं होने देंगे
सांसद राजाराम सिंह ने कहा कि किसी भी विदेशी ताकत को भारतीय किसानों के अधिकार छीनने नहीं दिए जाएंगे। देश की खेती, किसान और मजदूरों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।
परिसीमन को लेकर जताई आशंका
सांसद राजाराम सिंह ने लोकसभा सीटों के परिसीमन पर कहा कि आबादी के आधार पर परिसीमन से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में अपनाए गए परिसीमन के तरीकों को लेकर सवाल हैं। उन्होंने आशंका जताई कि परिसीमन के जरिए उत्तर भारत में सीटें बढ़ाकर ऐसा राजनीतिक ढांचा तैयार किया जा सकता है, जिससे गैर-भाजपा या दक्षिणी राज्यों के सहयोग के बिना भी संवैधानिक संशोधन संभव हो सकें। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया।
