Sat, 09 19, 2026
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पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी का देसी अंदाज चर्चा में, बकरी-भेड़ पालकों के साथ चराईं बकरियां:

कार्यकर्ताओं की सुनी समस्याएं, शिक्षा व PWD अधिकारियों को लगाई फटकार

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टोंक। पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी का जमीन से जुड़ा अंदाज एक बार फिर देखने को मिला। चौरू क्षेत्र में सैनी बकरी-भेड़ पालकों के साथ खेतों में बकरियां चराते नजर आए। सिर पर देशी साफा, कंधे पर अंगोछा, हाथ में लाठी और धूप से बचने के लिए छतरी लिए उनका यह अंदाज ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

सैनी ने बकरी और भेड़ पालकों के साथ काफी समय बिताया और उनके साथ सहजता से बातचीत की। इस दौरान बकरी पालक शिवराज धाकड़ ने कहा, “साहब, आपको टीवी और अखबारों में देखा था। आज राजस्थान के पूर्व कृषि मंत्री को हमारे साथ बकरी चराते हुए देखा तो दिल प्रसन्न हो गया।”

पशुपालकों ने गिनाए सैनी के काम

बकरी पालक शिवराज धाकड़ और भेड़ पालक शिवराज गुर्जर ने कहा कि डॉ. सैनी के नेतृत्व में भेड़-बकरी पालकों के हित में कई काम हुए। उनके अनुसार, सैनी के कृषि मंत्री रहने के दौरान लागू योजनाओं से पशुपालकों को लाभ मिला और उन्हें आर्थिक रूप से संबल मिला।

ग्रामीणों के बीच सैनी का इस तरह सहजता से घुलना-मिलना उनके ग्रामीण परिवेश और किसानों-पशुपालकों से पुराने जुड़ाव की झलक देता नजर आया।

नैनवां में जनसुनवाई, अधिकारियों से जताई नाराजगी

चौरू क्षेत्र के दौरे के दौरान पूर्व मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने नैनवां में कार्यकर्ताओं और आमजन से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने शिक्षा विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उन्होंने बारिश से पहले मरम्मत कार्य समय पर नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से समस्याओं का जल्द समाधान करने को कहा। सैनी ने कहा कि समय पर काम नहीं होने से आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नैनवां-कोरमा रोड का किया औचक निरीक्षण

पूर्व मंत्री ने नैनवां-कोरमा रोड पर चल रहे विकास कार्यों का भी औचक निरीक्षण किया। उन्होंने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और मौके पर चल रहे कार्यों की स्थिति देखी। संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित मानकों के अनुरूप काम पूरा करने के निर्देश दिए।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा में देसी अंदाज

बकरी-भेड़ पालकों के बीच लाठी लेकर बकरियां चराते पूर्व मंत्री का यह अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि नेता जब आम लोगों के बीच सहजता से पहुंचता है और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से समझता है, तो इससे जनता के साथ उसका जुड़ाव और मजबूत होता है।

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