Fri, 09 18, 2026
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जयपुर की 200 साल पुरानी हवेली में मिला करोड़ों का खजाना, 5 कारीगरों ने बनाया था राज छिपाने का प्लान:

आरोपियों ने चांदी के सिक्के जयपुर से बाहर बेचे

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जयपुर। जयपुर की 200 साल पुरानी हवेली तोड़ते समय मिले करोड़ों रुपए के खजाने ने अब पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले राज खोल दिए हैं। खजाना मिलने के बाद भी पांचों कारीगर रोज की तरह हवेली तोड़ने का काम करते रहे, ताकि किसी को शक न हो। इसके बाद चांदी की सिल्लियां और सिक्के चोरी-छिपे ठिकाने लगाए गए। यहां तक कि करोड़ों के खजाने को स्कूटी पर रखकर हवेली से बाहर ले जाया गया।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने खजाना मिलते ही उसे छिपाने और बाद में आपस में बांटने की पूरी योजना बना ली थी। करीब 10 महीने तक मामला दबा रहा, लेकिन बंटवारे को लेकर विवाद होने के बाद खजाने का राज खुल गया।

डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा के अनुसार, पांचों आरोपियों ने चांदी के सिक्के बेचकर मिले लाखों रुपए से अपनी जरूरतें पूरी करना कबूल किया है। आरोपियों ने करीब 1500 चांदी के सिक्के आपस में 300-300 बांट लिए थे। एक आरोपी ने सिक्के बेचकर जेसीबी और दो ट्रैक्टर खरीदे, जबकि एक अन्य मजदूर ने इन्हीं पैसों से अपनी बेटी की शादी की। एक आरोपी ने चांदी बेचकर अपने लिए गहने भी बनवाए।

चांदी की सिल्लियां जंगल में दबाईं

पुलिस के मुताबिक हवेली तोड़ने के दौरान मिली चांदी की दो बड़ी सिल्लियां करीब 66.400 किलो वजनी थीं। आरोपियों ने इन्हें तुरंत बेचने के बजाय जामडोली के पास जंगल में गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा दिया। योजना थी कि दो-तीन साल बाद जब मामला पूरी तरह शांत हो जाएगा, तब सिल्लियों को निकालकर बेचेंगे और रकम आपस में बांट लेंगे।

पुलिस अब जंगल में दबाई गई चांदी की सिल्लियों और छिपाए गए 1500 सिक्कों की बरामदगी के प्रयास में जुटी है। इसके अलावा जयपुर से बाहर चांदी के सिक्के खरीदने वालों की भी तलाश की जा रही है।

खजाना मिला, फिर भी करते रहे हवेली का काम

मामला त्रिपोलिया बाजार स्थित विद्याधर का रास्ता की हवेली का है। जर्जर हो चुकी करीब 450 वर्गगज हिस्से वाली इस हवेली को नगर निगम के नोटिस के बाद तोड़ने का काम शुरू किया गया था। राहुल सेठी ने भवन तोड़ने और नया निर्माण कराने का एग्रीमेंट एक निजी कंपनी से किया था। हवेली तोड़ने का ठेका चार लाख रुपए में महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू को दिया गया था।

नवंबर 2025 में काम शुरू होने के करीब 10 दिन बाद कारीगरों को चांदी की बड़ी सिल्ली मिली। खजाना देखते ही पांचों ने एक-दूसरे को समझाया कि यदि इसकी जानकारी मालिक को दी गई तो पूरा खजाना चला जाएगा। इसके बाद सभी ने चुप रहने और माल आपस में बांटने की योजना बनाई।

शक से बचने के लिए अगले दिन भी सभी उसी तरह हवेली तोड़ने में जुट गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो। शाम को अंधेरा होने पर चांदी की सिल्ली को स्कूटी पर रखकर वहां से निकाल लिया गया।

ठेकेदार ने रखीं दो सिल्लियां, मजदूरों को मिले 300-300 सिक्के

बाद में हवेली की खुदाई के दौरान एक और बड़ी चांदी की सिल्ली और बड़ी संख्या में चांदी के सिक्के मिले। ठेकेदार ने खजाना स्कूटी के जरिए बाहर पहुंचाया। पांचों ने आपस में बंटवारा किया। ठेकेदार ने दो चांदी की सिल्लियां और करीब 300 सिक्के अपने पास रखे, जबकि चार अन्य आरोपियों को 300-300 सिक्के दिए गए।

पुलिस ने मामले में महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू, जगदीश राजोरिया, ओमप्रकाश खींची उर्फ पप्पू, अनुज अरोड़ा और रजनी मल्होत्रा को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस अब खजाने की पूरी बरामदगी के साथ उन लोगों तक पहुंचने में जुटी है, जिन्हें चांदी के सिक्के बेचे गए थे।

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