Fri, 09 18, 2026
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अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की सप्लाई का मामला, एक नंबर पर 1283 कॉल:

जेल से जुड़े मोबाइल नंबर के बैंक खाते में करीब ₹50 लाख का लेन-देन, कैदी की शिकायत के बाद खुला मामला

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अजमेर। अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की कथित सप्लाई और जेल के अंदर से ऑनलाइन पैसों के लेन-देन का मामला सामने आया है। जेल प्रशासन की जांच में सामने आया कि जेल के एसटीडी नंबर से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किए गए। जांच में इस मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते में करीब 49.80 लाख रुपए का क्रेडिट लेन-देन सामने आया है।

मामले में जेल प्रहरी महिपाल मंगलोदा की रिपोर्ट पर 19 अगस्त को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में करण सिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज को आरोपी बनाया गया है। ये सभी पहले अजमेर सेंट्रल जेल में बंद थे और वर्तमान में जमानत पर बाहर बताए जा रहे हैं।

कैदी ने मारपीट और नशे की गोली बेचने का लगाया था आरोप

जेल में हत्या के दो मामलों में बंद भीकाराम ने 22 जुलाई 2025 को पीआईसीएस (जेल एसटीडी) के माध्यम से डीजी जेल को शिकायत भेजी थी। शिकायत में उसने विचाराधीन बंदियों करण सिंह और कमल सिंह पर मारपीट करने का आरोप लगाया था।

शिकायत के अनुसार दोनों बंदी जेल में नशे की गोली करीब 500 रुपए में बेचते थे और इसके बदले रुपए एक मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन डलवाए जाते थे। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।

जांच में एक नंबर पर 1283 बार कॉल

कैदी की शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि जेल के एसटीडी से एक ही मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किए गए थे। एक दिन में इस नंबर पर 3 से लेकर 29 बार तक कॉल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई।

यह मोबाइल नंबर श्रीनगर थाना क्षेत्र के कनाखेड़ी निवासी जयराम रावत के नाम बताया गया है।

बैंक खाते में करीब 49.80 लाख रुपए का क्रेडिट

जांच के दौरान पुलिस और जेल प्रशासन ने मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते का स्टेटमेंट भी खंगाला। इसमें 1 जनवरी 2024 से 20 अप्रैल 2026 के बीच करीब 49 लाख 79 हजार 967 रुपए क्रेडिट होने की जानकारी सामने आई। हालांकि खाते का क्लोजिंग बैलेंस महज 13,358 रुपए बताया गया।

जांच में जयराम रावत के चचेरे भाई शिवराज सिंह का नाम भी सामने आया। पूछताछ में उसने बताया कि वह कभी-कभी जेल में बंद कैदियों के लिए जरूरी सामान पहुंचाता था और बंदियों के परिजन उसके माध्यम से ऑनलाइन रुपए भेजते थे। जांच के अनुसार जयराम रावत का मोबाइल नंबर तीन बैंक खातों से जुड़ा हुआ था।

जेल के एसटीडी और कैंटीन व्यवस्था पर भी उठे सवाल

जांच रिपोर्ट के अनुसार जेल में कैदियों के लिए एसटीडी और कैंटीन की व्यवस्था है। एक बंदी को कैंटीन के लिए हर महीने करीब 3500 रुपए तक मिलते हैं। यदि 15 बंदियों की अधिकतम सीमा मानें तो सालाना राशि करीब 6.30 लाख रुपए बैठती है।

ऐसे में एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते में जेल से करीब 50 लाख रुपए के लेन-देन का सामने आना जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।

जेलकर्मियों की मिलीभगत की आशंका

जेल प्रशासन की जांच रिपोर्ट में जेलकर्मियों की संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है। जांच इस बिंदु पर भी होगी कि जेल के एसटीडी से एक ही मोबाइल नंबर पर लगातार कॉल किए जाने के पीछे किसकी भूमिका थी और संबंधित व्यक्ति को इससे क्या लाभ मिला।

फिलहाल सिविल लाइंस थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस नशे की गोलियों की कथित सप्लाई, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, बैंक खातों में हुए लेन-देन और जेलकर्मियों की संभावित भूमिका समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

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