Wed, 07 22, 2026
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1 किलो अदरक की कीमत थी 2 भेड़ बराबर:

1 किलो अदरक की कीमत थी 2 भेड़ बराबर:अदरक के बूते फ्रांसीसी सम्राट ने प्रेमिकाओं को रिझाया, दुनिया में इसकी 1600 किस्में

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भारतीय घरों की रसोई ऐसी जगह है, जहां खाने को जायकेदार बनाने वाली कोई एक चीज न हो तो उसका विकल्प खोज लिया जाता है। मगर यह भी सच है कि कुछ चीजों का कोई तोड़ नहीं होता। अदरक उन्हीं में से एक है।

चीन के लोग भले ही सैकड़ों वर्ष से अदरक को पानी में उबालकर दवा के तौर पर पी रहे हैं, लेकिन दुनिया को दूध की चाय में अदरक का स्वाद भारतीयों ने दिया। तभी तो गर्मी और उमस भरे इस मौसम में दाम बढ़ने पर अदरक की चर्चा हर जुबान पर है।

दरअसल, हाल के दिनों में मध्य प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा अदरक पैदा करने वाले कर्नाटक में ही इसके दाम 400 रुपए किलो तक पहुंच गए। जबकि, कोल्हापुर मंडी में इसके दाम 220 रुपए किलो तक आ गए थे।

ग्रैफिक के जरिए जानिए पिछले दस साल में देश में कब-कब अदरक 200 रुपए किलो के पार पहुंचा:

अदरक हल्दी की बहन, जड़ नहीं तना है

अदरक जिंगीबेरेसी (Zingiberaceae) फैमिली का फूल वाला पौधा है, जिसकी मेंबर हल्दी भी है। यानी मसालों की दुनिया में अदरक को हल्दी की बहन भी बोल सकते हैं।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अदरक जड़ नहीं है, तना है। हल्दी और अदरक दोनों एक ही परिवार के सदस्य हैं तो जाहिर है इनके गुण भी समान हैं।

दोनों की तासीर गर्म होती है। इस वजह से जब भी घर में किसी को सर्दी-जुकाम हो तो खाने-पीने वाली चीजों में हल्दी और अदरक की मात्रा बढ़ा दी जाती है। हालांकि, टेस्ट में हल्दी और अदरक दोनों का मिजाज अलग है।

हल्दी की इंडियन किचन में मौजूदगी अनिवार्य है। मगर अदरक हमेशा उपलब्ध रहे, यह रसोई घर का शर्तिया नियम नहीं है।हालांकि, अगर किचन में अदरक है तो तय है जायके का मजा दोगुना हो जाएगा।

अदरक की लहसुन के साथ शानदार जुगलबंदी

अदरक भले ही हल्दी का पारिवारिक सदस्य है, लेकिन उसकी जुगलबंदी लहसुन के साथ अधिक जमती है। खाने-पीने के शौकीन जानते हैं कि अदरक-लहसुन का पेस्ट रहे तो सब्जी बेजोड़ बनती है।

मुंबई के मशहूर होटल में शेफ विनय कुमार कहते हैं कि जिन उत्तर भारतीय घरों में मसालेदार और जायकेदार खाना खाया जाता है, उनका किचन अदरक-लहसुन के बिना अधूरा माना जाता है।

अदरक-लहसुन ग्रेवी वाले नॉनवेज में बराबरी की हिस्सेदारी निभाते हैं, लेकिन जैसे ही कबाब बनाने या तंदूरी डिश की बात आए तो वहां अदरक का रोल बढ़ जाता है। नॉनवेज डिशेज को अदरक के लच्छे और बारीक कटी हरी मिर्च से गार्निश किया जाता है।

रोटी में लिपटे सालन के निवाले में बारीक कटी अदरक जब दांतों के बीच आती है तो नॉनवेज फूड की लज्जत ही अलग हो जाती है।

शाक्त संप्रदाय में देवी को बलि की जगह अदरक चढ़ाते हैं

आयुर्वेदाचार्य और तंत्र विद्या पर ‘श्रीविद्या चक्रार्चन महायोग-वैज्ञानिक विमर्श एवं विधि’ किताब के लेखक डॉ. आर. अचल ने बताया कि हिंदू धर्म में शाक्त संप्रदाय के लोग देवी पूजा करते हैं। इसमें देवी काली को बलि दी जाती है।

हालांकि, जिन परिवारों में बलि का चलन नहीं है, वो अदरक को लहसुन और नमक के साथ देवी को चढ़ाते हैं। यह बलि का प्रतीक है। देवी को चढ़ाने से पहले अदरक का मंत्रों से शोधन किया जाता है।

दूध के साथ सूखी अदरक यानी सोंठ के इस्तेमाल से बढ़ेगी इम्यूनिटी

डॉ. अचल ने बताया कि अदरक को सुखाकर सोंठ बनाई जाती है। इसमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फाइबर, सोडियम, विटामिन ए और सी, जिंक, फोलेट एसिड, फैटी एसिड होता है। सोंठ को दूध और चाय में इस्तेमाल कर इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है।

सर्दी शुरू होने के साथ अदरक खाना शुरू करते हैं, गर्मी में परहेज करें

डॉ. अचल कहते हैं कि इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए ही लोगों ने कोरोना महामारी के दौरान अदरक या सोंठ का खूब इस्तेमाल किया, लेकिन अदरक का लगातार इस्तेमाल नुकसानदायक होता है।

यही वजह रही कि कोरोना के बाद डॉक्टरों के पास आने वाले बवासीर के मरीजों की संख्या बढ़ गई। अभी इसका कोई आधिकारिक सर्वे सामने नहीं आया है, लेकिन सच है कि बवासीर के मरीज बढ़े हैं। कई ने नाक से ब्लीडिंग की शिकायत की। बेहतर है कि अदरक या सोंठ का खाने में सर्दियों में ही इस्तेमाल करें।

डॉ. अचल ने बताया कि भारतीय संस्कृति में सर्दियों में ही अदरक खाने का चलन रहा है। अक्टूबर से सर्दियां शुरू होती हैं यानी आसान लहजे में कहें तो शारदीय नवरात्र से मौसम सर्द होने लगता है। भारत में तभी अदरक खाना शुरू होता रहा है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में मकर संक्रांति पर गुड़-अदरक भी चढ़ाया जाता है। होली के बाद गर्मियां शुरू होती हैं, तब अदरक खाने में इस्तेमाल कम हो जाता है।

हालांकि जरूरत के हिसाब से बाकी दिनों के लिए अदरक को सुखाकर रख लिया जाता है, लेकिन आजकल अदरक का पूरे साल इस्तेमाल बढ़ा है। लोग गर्मी के दिनों में भी ‘अदरक वाली चाय’ की डिमांड कर रहे हैं, जबकि यह सेहत के लिहाज से उचित नहीं है।

अदरक की चाय से मन तरोताजा, वजह वैज्ञानिक

अदरक के चाय में जाते ही चाय पीने वाले जोशीले हो उठते हैं। अदरक की चाय मतलब मन तरोताजा हो उठे। यह अनायास नहीं बल्कि इसकी एक वैज्ञानिक वजह है।

अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की 2013 और 2017 में की स्टडीज में बताया गया कि अदरक खाने से बॉडी में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हॉर्मोन बढ़ जाते हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति का मिजाज खुशगवार हो जाता है। डॉक्टरी लहजे में कहे तो एंग्जाइटी, डिप्रेशन भी दूर होता है। अदरक से डिमेंशिया, अल्जाइमर जैसी बीमारियों से बचने में भी मदद मिलती है।

दुनिया में अदरक की 1600 वैराइटी

सैन डिएगो जू वाइल्ड लाइफ एलायंस के मुताबिक, दुनिया भर में अदरक की करीब 1600 वैराइटी पाई जाती हैं। अफ्रीका, एशिया और अमेरिका में ये वैराइटी उगाई जाती हैं।

वैसे बता दें कि दुनिया को अदरक भारत ने ही दी और आज भी भारत ही अदरक का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत में सबसे ज्यादा अदरक मध्य प्रदेश में उगाई जाती है।

सेंट्रल अफ्रीका में एफ्रामोमम गाइगेंटियम और इंडोनेशिया में एटलिंगेरा पनिसी अदरक की ऐसी वैराइटी हैं जिनके पौधे 20 फीट तक बड़े हो जाते हैं। हालांकि, अदरक की अधिकांश वैराइटी के पौधे 6 फीट तक लंबे होते हैं।

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