Wed, 07 22, 2026
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आजादी के बाद भी नहीं बदले हालात, आज भी बोट पर बैठकर मांगने पहुंचते हैं वोट:

खिदरपुर जादौन पहुंचने को पार करनी पड़ती है बनास नदी, यहां नौका में बैठकर चुनाव कराने पहुंचती रही हैं पोलिंग पार्टियां

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सवाईमाधोपुर जिले के खिदरपुर जादौन ग्राम पंचायत में लोकतंत्र की डगर बीच मंझधार में नजर आती है। वादे, इरादे सब यहां हर बार की तरह बारिश बहा ले जाती है। बाकी रहता है तो सिर्फ धूल भरा रास्ता। आजादी के 76 साल बाद भी डांग क्षेत्र के इस गांव की डगर बिल्कुल नहीं बदली है। चाहे पोलिंग पार्टियों हो या नेता। वोटिंग करानी है या वोट मांगना है तो नौका का सहारा लेना ही पड़ेगा।
बता दें कि खिदरपुर जादौन ग्राम पंचायत तीन तरफ बनास नदी और एक तरफ रणथम्भौर से घिरी है। गांव में चार हजार की आबादी है और करीब दो हजार मतदाता। हर बार चुनावों में यहां जनप्रतिनिधि बोट में बैठकर वोट मांगने आते हैं। विकास का वादा भी करते हैं, लेकिन जीतने के बाद यह वादे रखे रह जाते हैं। यही कारण है कि आजादी के 76 साल बाद भी यहां हालात नहीं बदले हैं। यहां चुनाव कराने पोलिंग पार्टियां बोट से ही पहुंचती रही हैं। हालांकि इस बार बारिश कम हुई है। ऐसे में इस बार चुनाव है तो एक कच्चा रास्ता गांव में पहुंचन को इस बार बनाया गया है। फिर भी इस कच्चे रास्ते में पानी है। ऐसे में ऊंचे चार पहिया वाहन ही यहां से निकल सकेंगे।
वादों की तरह हर बार बह जाती है सड़क : खिदरपुर जादौन तक पहुंचने के लिए हर बार कच्ची सड़क बनाई जाती है। लेकिन यह भी स्थायी नहीं रहती। वादों की तरह यह भी हर बार बारिश में बह जाती है। हर बार यहां फिर से बारिश के बाद कच्ची सड़क बनवाई जाती है, लेकिन अभी तक गांव को मुख्य धारा से जोड़ने का कोई हल नहीं खोजा गया है।
नांव से पहुंचती रहीं हैं पोलिंग पार्टियां
खिदरपुर जादौन पंचायत में म्हारो, लुडावणी, किराड़ती, भावपुर आती हैं। चारों को मिलाकर कुल दो हजार के करीब यहां मतदाता हैं। वोट देने के लिए गांव के लोग भी चार-पांच किलोमीटर दूर ढाणियों से पैदल चलकर आते हैं। यहां दो पोलिंग बूथ भावपुर और खिदरपुर जादौन में बनाए जाते हैं। यहां अभी तक चुनाव कराने के लिए पोलिंग पार्टियां नौका से पहुंचती रहीं हैं। यदि किसी बार पानी कम भी रहा हो तो उन्हें पानी में घुसकर पैदल चलकर ही गांव पहुंचना पड़ा है।

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