विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही राजनीतिक दल चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। साथ ही चुनाव आयोग ने भी मोर्चा संभाल लिया है। चुनाव में समय पर वाहन उपलब्ध करवाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला परिवहन विभाग पर है।
जिला प्रशासन की ओर से गत दिनों एक पत्र परिवहन विभाग को भेजकर चुनाव के लिए करीब 1064 वाहन अलग-अलग श्रेणी में मांगे हैं। लेकिन इसमें कुछ वाहन उपलब्ध हैं लेकिन कुछ नहीं मिल रहे। जिस पर अब जिला परिवहन विभाग ने पड़ौसी जिले कोटा व मध्यप्रदेश के सोयत, मंदसौर, जीरापुर,भानपुरा आदि क्षेत्रों से भी सहयोग मांगा है। हालांकि, मध्यप्रदेश में भी राजस्थान के साथ ही विधानसभा चुनाव है, केवल मतदान तारीखों में फर्क है। जिससे राजस्थान को मदद मिलने की उम्मीद है।
गत चुनाव में भी बड़ी संख्या में बसे ली गई थी। प्रदेश में विधानसभा की 200 सीटों पर आगामी 25 नवम्बर को मतदान होगा। उस समय शादी विवाह में बसें बुक होने से भी परेशानी आ रही है। क्योंकि परिवहन विभाग को सैकड़ों की संख्या में वाहनों का अधिग्रहण करना है।
कोटा से लिए थे गत बार 40
सूत्रों ने बताया कि पड़ौसी जिले कोटा से वाहन की उम्मीद की जा रही है। इस बारे में कोटा प्रशासन से भी चर्चा की गई है।गत चुनाव में भुगतान को लेकर हुई परेशानी के चलते स्थानीय ट्रांसपोर्टर ने नाराजगी व्यक्त की हैं। हालांकि, प्रशासन ने भुगतान को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं आने का भरोसा दिया है।
सुपूर्द किया
जिले में विधानसभा आचार संहिता लगने के बाद चारों विधानसभा के लिए 10 व 11 अक्टूबर को दूसरा राउंड कर करीब 40 वाहन अधिग्रहण कर जिला प्रशासन के सुपुर्द कर दिए हैं। ये वाहन उडऩदस्ता,वीडियो निगरानी दल, सेक्टर मजिस्ट्रेट को दिए गए है।
किसे कितने चाहिए
जिले में विधानसभा चुनाव संपन्न करवाने के लिए पूल अनुभाग को 704 तथा पुलिस विभाग को 360 वाहन चाहिए। जिसमें बड़ी बस 30, मिनी बस35, कार215, मिनी ट्रक15, टाटा मैजिक आदि 65 चाहिए। पुलिस के जवानों को संवेदनशील व अतिसंवेदनशील स्थानों पर समय पर पहुंचाने
