नौ माह गर्भ में रखा और पैदा होने पर कलेजे के टुकड़े को झाड़ियों में मरने के लिए फेंक दिया। एक -दो नहीं बल्कि लगातार चार दिन में तीन ऐसे नवजात मिल चुके, जिन्हें पैदा होने के बाद मरने के लिए यहां-वहां फेंका गया। नागौर जिले में लगातार हुई इन घटनाओं ने हर किसी के मन को मानों झकझौर दिया। हर कोई उस जन्म देने वाली कलयुगी मां को कोस रहा है। पहले नागौर और फिर अब कुचामन शहर व लाडनूं में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें नवजात पड़े मिले। बहरहाल कारण अनचाहे गर्भ का हों या फिर अन्य, लेकिन यह किसी भी सूरत में ठीक नहीं। पुलिस और अन्य एजेंसी ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांचें।
झाड़ियों में फेंका, कीड़े खा गए, बचा नहीं सके
नागौर के जेएनएन चिकित्सालय में 16 अक्टूबर को नवजात झाड़ियों में पड़ी मिली। वह कई घंटे पड़ी रही, इससे कीड़ों ने लहूलुहान कर दिया। शरीर पर दर्जनों घाव कर दिए।
बाद में उसे चिकित्सालय में लाए, फिर उसे रैफर किया गया, लेकिन बचा नहीं सके।
मासूम का चेहरा देख हर किसी का दिल पसीजा
लाडनूं के चिकित्सालय में 19 अक्टूबर को छोड़े गया नवजात टाट में लपेटा हुआ था। टाट में कसकर लपटे रहने से उसके हाथ-पैरों में सूजन आ गई थी। मासूम के चेहरे को देख यहां हर किसी का मन कचोटता रहा। वह यही कहते दिखाई पड़े कि ऐसी निर्दयता क्यों।
कुचामन सिटी में 19 अक्टूबर की रात लुहारिया का बास में एक घर की चौखट पर कोई नवजात को पटक गया। उसके रोने की आवाज घर में पहुंची तो नींद खुली। घर में रह रहे लोगों के लिए यह चौंकाने वाला रहा। नवजात कपड़े और पेपर में लिपटा हुआ था। बाद उसे चिकित्सालय पहुंचाया। यहां इससे पहले 12 नवजात मिल चुके।
जानकारों ने बताया कि ऐसे मामले अक्सर अनचाहे गर्भ के होते हैं। जिनमें लोकलाज से बचने के लिए बच्चों के पैदा होने पर उन्हें यों झाड़ियों या अन्य जगहों पर फेंकने के मामले सामने आते हैं।
