Wed, 07 22, 2026
देश

कालदां के जंगलों में फिर गूंजेगी बाघों की दहाड़:

वन विभाग करवा रहा है जंगल को बाघों के अनुकूल बनाने के कई काम

post-img

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में बाघों के प्राचीन कॉरिडोर को फिर से बाघों के अनुकूल विकसित के लिए वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग 148 डी पर बसोली के निकट टाइगर रिजर्व बनने के बाद अस्तित्व में आई नई रेंज का काम शुरू हो गया है। साथ ही कोर के साथ साथ बफर क्षेत्र को भी बाघों के अनुकूल के अनुकूल बनाने के लिए कई काम शुरू हो चुके हैं। जानकारी अनुसार यहां पर विलायती बबूलों को हटाकर नए छायादार व फलदार पेड़ पौधे लगाने, नए पैदल ट्रैक बनाने गश्ती दल के वाहनों के लिए रास्ते बनाने, जंगल मे आने जाने वालों पर नजर रखने के लिए निगरानी दल गठित करने सहित कई कार्य वन विभाग ने शुरू किए हैं। बसोली में नया क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय अस्तित्व में आने से क्षेत्र में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी तथा शिकार सहित जंगल में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
आने वाले समय में कालदां के जंगलों में फिर से बाघों की दहाड़ सुनाई देगी, जो क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इन कार्यों के होने से क्षेत्र में ग्रामीण युवाओं को इको टूरिज्म के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। तथा होटल, जिप्सी सहित इको टूरिज्म से जुड़े नए व्यवसाय भी बन पाएंगे।
कालदां का जंगल टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बफर वन क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र हैं जिसमें करीब 300 वर्ग किलोमीटर तक ना कोई आबादी है और नहीं किसी तरह की खेती होती है । इस वजह से यह क्षेत्र वन्य जीवों के लिए वह बाघों के लिए हमेशा अच्छा आश्रम स्थल रहा है।
बारहमासी जलस्रोत है यहां
कालदां जंगल में 12 माह जल के स्रोत बहते रहते हैं, तथा दो दर्जन से अधिक प्राकृतिक नाले है। भीमलत क्षेत्र से देवझर महादेव तक सघन जंगल में विलायती बबूल को हटाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट सकता है। यहां पर कुछ पशुपालक बरसात के दिनों मे बाड़े बना लेते थे, जिन्हें भी इस साल वन विभाग ने अंकुश लगाया है, और अब यहां पर ग्रेसलैंड डवलप किया जा रहे हैं। ताकि शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या बढ़े।
बनेंगे एनीकट व चेक डैम
वन विभाग क्षेत्र में जल्दी ही वन्यजीवों के पेयजल व्यवस्था के लिए नए चेकडेम व एनीकट निर्माण कराएगा। साथ में कृत्रिम जल स्रोतों को भी विकसित करने का काम शुरू कर दिया है। यहां पर वर्तमान में पैंथर, चिंकारा खरगोश, सांभर, जंगली सूअर सहित विभिन्न प्रजाति के वन्य जीव मौजूद हैं।
12 लाख की लागत से बन रहा है रेंज भवन
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यहां पर राष्ट्रीय राजमार्ग 148 दिन बसोली के निकट 12 लाख की लागत से रेंज भवन का निर्माण कार्य हो रहा है, जिसके लिए भूमि चिह्नित कर कार्य शुरू करवा दिया गया है। यहां पर रेंज का निर्माण होने के बाद टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र की गश्त व पूरी निगरानी हो सकेगी।
दुर्वासा महादेव के पास बनेंगे दो वॉच टावर
टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दुर्वासा महादेव के निकट व कालदां क्षेत्र में दो वाच टावर का निर्माण हो,गा जहां पर वन्य जीवों व गैर वानिकी गतिविधियों के साथ अवैध परिवहन पर नजर रहेगी। डाटुंडा माता के पास एक चेक पोस्ट का भी निर्माण करवाया जा रहा है जहां पर बैरियर लगाकर वाहनों की चेकिंग की जाएगी।

 

Related Post