दो दशक पहले तक 2 दर्जन से अधिक गांवों के लोगो की प्यास बुझाने वाला मोहनपुरा बांध व भंडारी का विशनसमंद बांध अब पानी के लिए तरस गया है। इस वर्ष बारिश की विदाई हो चुकी है। लेकिन दोनों बांधों के तले रीते पडे़ हैं। इसके अलावा तालाब भी सूखे पड़े हुए हैं। जो अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। इस बार प्रदेश के विभिन्न इलाकों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन माड़ क्षेत्र में कम बारिश होने के कारण बांधों के अलावा तालाब रीते ही रह गए। इसके अलावा एक कारण यह भी रहा कि बांध के पानी के आवक रास्तों में एक दर्जन से भी अधिक एनीकट बनने के साथ अवैध खनन के कारण खाई हो गई हैं, जिससे पानी आगे बढ़ नहीं सका। उल्लेखनीय है कि आषाढ़ की बारिश के बाद ही मोहनपुरा बांध पानी से लबालब भर जाता था। जिसमें सावन माह में बांध में हिलोरें लेती तरंगों से मन प्रफुल्लित हो जाता था। वहीं लोग बांधों की पाल पर लोग पूरे महीने पेड़ों की छांव में गोठ व पिकनिक मनाने आते थे। दूसरी ओर बांध के भरने से मोहनपुरा सहित आसपास के गांवड़ी, पुरा, धौलेटा, धवान, सागरपुर, आंधियांखेड़ा, भीला पाड़ा सहित दो दर्जन से अधिक गांव में भूजल स्तर बना रहता था। इससे कुंओं सहित हैण्डपंप व नलकूपों में पानी की प्रचुरता बनी रहती थी। साथ ही लोग पानी को खेती-बाड़ी के उपयोग में काम में लेते थे। लेकिन लगातार बारिश की कमी के साथ पानी आवक के रास्ते में बने एक दर्जन से अधिक एनीकट बांधों के पानी को लील गए। इससे वर्षभर पानी से लबालब भरे रहने वाला बांध अब पानी को तरस गए हैं। इस कारण बांधों में पानी की जगह अब रेत के दरिया नजर आने लगे हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार मोहनपुरा बांध की भराव क्षमता 16.5 फिट है तो विशन समंद बांध की भराव क्षमता 26 फीट है।
12 करोड़ रुपए खर्च फिर भी पानी नहीं
करीब 7 वर्ष पूर्व सिंचाई विभाग ने दोनों बांधों पर 12 करोड़ रुपए खर्च कर बांधों की मरम्मत के साथ जीणोद्धार व सुदृढ़ीकरण का कार्य करवाया था। लेकिन पानी के अभाव में नहरें छतिग्रस्त हो गई। दूसरी ओर बांध भी अनुपयोगी साबित हो रहा है।
