Wed, 07 22, 2026
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खास है काछेला एनर्जी प्लांट: बबूल की झाड़ियों से 12 मेगावाट बिजली का उत्पादन:

वर्ष 2010 में बायो मॉस पॉलिसी के तहत स्थापित किया गया था यह एनर्जी प्लांट, अब नेहड़वासियों के लिए उपयोगी

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नेहड़ क्षेत्र में काछेला स्थित ग्रीन एनर्जी प्लांट स्थानीय ग्रामीणों के रोजगार का माध्यम बना हुआ है। वर्तमान में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 3 हजार लोगों को इससे लाभ मिल रहा है। वहीं यह प्लांट 12 मेगा वॉट बिजली का उत्पादन भी कर रहा है। यानि 12000 यूनिट प्रति घंटे का बिजली का उत्पादन बबूल की लकड़ी से ही हो रहा है। यह सांचौर का एक मात्र ग्रीन एनर्जी प्लांट है जहां पर बबूल की झाडिय़ों के टुकड़ों से बिजली का उत्पादन हो रहा है। यहां बिजली का उत्पादन होने के बाद 132 केवी जीएसएस गलीफा होते हुए 220 केवी जीएसएस कारोला तक बिजली पहुंचाई जाती है। इधर, इस कंपनी के द्वारा 2 मेगावाट का सोलर प्लांट व सीएनजी प्लांट का कार्य भी जारी है।
इस तरह मिल रहा फायदा
ग्रीन एनर्जी के लिए नेहड़ के ग्रामीणों की ओर से बबूल को काट कर कुत्तर बना कर प्लांट पर सप्लाई किया जा रहा है। इस कार्य के लिए 80 मशीन प्लांट के 50 किलो मीटर के दायरे मे संचालित हो रही है। ये इसी एनर्जी प्लांट की मशीनरी है। इस कार्य के लिए ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। पूरे प्रोजेक्ट में विभिन्न स्तर पर 3 हजार के लगभग ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है।
यह प्रक्रिया बिजली उत्पादन के लिए
बायो थर्मल प्रक्रिया के तहत यहां बिजली का उत्पादन होता है। बबूल के 5-5 एमएमस के टुकड़े बॉयलर में पहुंचाए जाते हैं। उसके बाद हिट से स्टीम जनरेट होती हे और टरबाइन रोटेट होते हैं। इस प्रक्रिया से बिजली का उत्पादन होता है।
इसलिए हुई नेहड़ में पहल
नेहड़ क्षेत्र में बबूल की भरमार है। बबूल की लकड़ी का उपयोग जलाने के लिए ही किया जाता है। इसी कारण से बायो मॉस पॉलिसी के तहत वर्ष 2010 में काछेला में यह प्लांट स्थापित किया गया।
मिल रहा रोजगार
काछेला में 12 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा सोलर एनर्जी के साथ बायो गैस प्लांट भी स्थापित किया जा रहा है। बायो गैस प्लांट में नेपियर घास की जरुरत रहती है। 100 एकड़ में नेपियर घास लगाने का कार्य भी चल रहा है। पूरे प्रोजेक्ट में स्थानीय ग्रामीणों को ही रोजगार उपलब्ध होता है।

 

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