वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने गत दिनों गांव सूरजपुरा स्थित तालाब में जाल में फंसे अजगर का इलाज करा उसे नर्सरी में रखा। दो दिन पहले घायल अजगर के स्वास्थ्य की जानकारी लेने कमरे में घुसे वनकर्मी राधाकिशन पर अजगर ने अचानक से हमला करते हुए उसके हाथ में तीन दांत गढ़ा दिए और उसे जकड़ लिया। साथियों ने अजगर को अलग कर वनकर्मी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां दो दिन चले उपचार के बाद वनकर्मी की हालत में सुधार है। जिले में अजगर को रेस्क्यू करने के दौरान हमले की यह दूसरी घटना है। जिसमें दोनों वनकर्मियों की जान के लाले पड़ गए। गत माह हुई घटना में सहायक वनपाल गोपाल सिंह अचेत हो गया हालांकि, गोपाल का अभी भी इलाज चल रहा है। दोनों मामलों में वनकर्मियों पर बेहतर उपकरण नहीं होने से हमले के दौरान घायल होना बड़ी वजह रही। रेस्क्यू टीम के सदस्य साहस और अपनी सूझबूझ से ही अजगर पर काबू पा रहे हैं। हालांकि, वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि विभाग के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
रेस्क्यू टीम पर संसाधनों की कमी
वन विभाग की रेस्क्यू टीम पर बेहतर संसाधन नहीं है। अजगर समेत अन्य सर्प को पकडऩे के लिए अच्छी गुणवत्ता के दस्ताने होने चाहिए। जिससे हमले से बचाव हो सके। वहीं, स्थानीय टीम पर पुराने दस्ताने से काम कर रही है। उक्त दस्ताने बिजली कार्य के दौरान इस्तमाल होते हैं। वहीं, विभाग ने हाल में नई स्टिक मंगाई है। भारी-भरकम अजगर को पकडऩे के दौरान कई दफा स्टिक मुड़ जाती है। वहीं, पकडऩे के बाद जीव-जन्तु को रखने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। जिससे उसका बेहतर रख-रखाव हो सके।
