Thu, 07 23, 2026
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पिछले चुनाव में खर्च हुए थे छह करोड़, बारां की 4 सीटों पर अब अधिक खर्च का अनुमान:

करोड़ों रुपए में सम्पन्न होते हैं चुनाव

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 इस बार एक विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधि चुनने में भारत निर्वाचन आयोग लगभग डेढ़ करोड़ रुपए खर्च करेगा। यह राशि चुनाव से पहले होने वाली तैयारियों से लेकर जन जागरूकता और मतगणना तक की है। खास बात यह कि यह राशि आम जनता की जेब पर सीधा बोझ होती है। बारां जिले में 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में चार विधानसभाओं में थे करीब छह करोड़ रुपए की राशि व्यय हुई थी। इनमें सर्वाधिक राशि मतदान दलों के कार्मिकों व पुलिस जवानों को दी गई थी। निर्वाचन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खर्च की सीमा तय नहीं होती, आवश्यकता अनुसार राशि व्यय की जाती है। निर्वाचन आयोग के खर्च में विधानसभा चुनाव पूर्व तैयारियों से लेकर मतगणना तक के सरकार की ओर से किए जाने वाले तमाम खर्चें शामिल होते है। चुनाव आयोग ने कई टेंडर में गत चुनाव की अपेक्षा कम रेट रखी है। फिर भी महंगई बढऩे से कई अन्य खर्चें बढ़ गए हैं। ऐसे में गत चुनाव की अपेक्षा इस बार राशि ज्यादा खर्च होगी।
बढ़ाई खर्च सीमा
इस बार महंगाई को देखते हुए सरकार ने विधानसभा व लोकसभा प्रत्याशियों के लिए खर्च की सीमा गत चुनाव से बढ़ा दी है।जहां गत विधानसभा चुनाव में विधानसभा प्रत्याशी अधिकतम 28 लाख रुपए खर्च कर सकता था। इस बार वह 40 लाख रुपए खर्च कर सकेगा। वहीं, लोकसभा प्रत्याशी जहां गत चुनाव में 70 लाख रुपए खर्च कर सकता था। इस बार वह 95 लाख रुपए खर्च कर सकेगा।
दलों की सीमा तय नहीं
विधानसभा व लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों के खर्च की सीमा भी सरकार ने तय कर रखी है, लेकिन राजनीतिक दलों के खर्च की कोई सीमा नहीं है। उन्हें बस अपने खर्च की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियां अपने हिसाब से चुनाव में खर्चा करती है।

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