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पांच भाषा लिख व पढ़ सकते थे राजा अजीत सिंह:

स्वामी विवेकानंद से थी अजीज मित्रता

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राजा अजीत सिंह
जन्म : 16 अक्टूबर, 1861
निधन: 18 जनवरी, 1901

जब हिन्दुस्तान में ब्रिटिश हुकूमत थी, तब खेतड़ी की रियासत कोटपूतली तक हुआ करती थी। स्वामी विवेकानंद के अजीज मित्र अजीत सिंह भी खेतड़ी रियासत के नरेश (राजा) रह चुके। अजीत सिंह का जन्म आज ही के दिन 16 अक्टूबर 1861 ई. को झुंझुनूं जिले के अलसीसर में हुआ था। आज उनकी जयंती है। उनके पिता का नाम छान्तु सिंह और मां उदावत थी। मात्र छह वर्ष की आयु में अजीत सिंह के ऊपर से माता - पिता का साया उठ गया था।

खेतड़ी नरेश फतेह सिंह ने अलसीसर प्रवास के दौरान अजीत सिंह को दत्तक पुत्र बनाया था। अजीत सिंह 1870 ई. में खेतड़ी नरेश बने। उन्होंने रानी चम्पावत से शादी की। स्वामी विवेकानंद व राजा अजीत सिंह पर रिसर्च कर चुके डॉ. जुल्फीकार भीमसर के अनुसार खेतड़ी नरेश अजीत सिंह अपने सम - सामयिक राजस्थानी राजाओं और प्रजा में बड़े लोकप्रिय शासक थे। उन्हें हिन्दी, अग्रेजी, उर्दू, संस्कृत और राजस्थानी सहित 5 भाषाओं का ज्ञान था। वे पांचों भाषा पढ़ व लिख सकते थे।

स्वामी विवेकानंद को विश्वधर्म परिषद और यूरोपीय देशों में धर्म प्रचारर्थ भिजवाने में राजा अजीत सिंह का सबसे बड़ा योगदान रहा है। इससे पहले अमरीका में भारत की छवि श्रेष्ठ नहीं थी। तब स्वामीजी ने उन्हें बताया कि वास्तव में भारत क्या है, उनके मुख से प्राचीन ग्रंथों की नई व्याख्या सुनकर वे चकित रह गए। तब अमरीका के सभी प्रमुख अखबारों में स्वामीजी के फोटो और उनका परिचय प्रकाशित हुआ था।

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