काले हिरणों के लिए समूचे एशिया में विख्यात जिले के पश्चिमी छोर पर स्थित तालछापर अभयारण्य इन दिनों परिंदों के कलरव से आबाद है। सर्दियों के मौसम की दस्तक के साथ ही कई देशों से शीतकालीन प्रवास पर आए शिकारी पक्षियों ने यहां अपना डेरा जमा लिया है। अभयारण्य में प्रचुर मात्रा में भोजन की उपलब्धता व सुरक्षित आवास इन्हें हजारों किमी दूर से यहां खींच लाता है। सपाट घास के मैदान में परिंदों की अठखेलियां देखने पर्यटकों की यहां भीड़ जुटने लगी हैं। रेंजर उमेश बागोतिया ने बताया कि सितम्बर से सैलानी पक्षियों का आवक शुरू हुई थी। इसके बाद अक्टूबर में कुछ प्रजातियों की चिडिय़ा अभयारण्य में आईं। अब नवम्बर माह की शुरूआत के साथ साथ ही दिन व रात के तापमान में गिरावट आने के साथ ही शिकारी पक्षियों का आगमन होने लगा है।
इन देशों से आते हैं पक्षी
तालछापर अभयारण्य में मध्य- पूर्वी एशिया समेत, कजाकिस्तान, यूरोप, रूस, मंगोलिया, अफगानिस्तान, चाइना, नेपाल, भूटान, हिमालय के तराई व ऊंचाई वाले इलाकों से शिकारी व अन्य पक्षी आते हैं। यहां पर पक्षियों के आने की मुख्य वजह घास के सपाट मैदान में पाए जाने वाले ग्रास हूपर्स, ड्रेगन फ्लाई, लोकोट्स क्रिकिट, मेंढक, छिपकली, स्पाइनी टेल्ड लिजर्ड, मॉनिटर लिजर्ड्स व कई प्रजातियों के सांप व अन्य कीट- पतंगों के तौर पर उपलब्ध भोजन की प्रचुरता है। इसके अलावा सुरक्षित आवास व रात्रि में बसेरे के लिए शांत वातावरण है।
पहली बार दिखे ये पक्षी
इस बार सर्दियों में प्रवास पर आए दो प्रजातियों की चिडिय़ा अभयारण्य में पहली बार दिखी हैं। सेंट्रल एशिया में विचरण करने वाला शिकारी पक्षी ऑस्प्रे की उपस्थिति अभयारण्य में पहली बार दर्ज की गई है।
यह मुख्यत: जलीय पक्षी है। जिसे समुद्रीबाज अथवा मछलीबाज भी कहा जाता है। पानी में पाए जाने वाले जलीय जीवों सहित मछली प्रमुख तौर पर इसका भोजन है। हालांकि राजस्थान के कई इलाकों में यह आता है। मगर, अभयारण्य में इसे पहली बार देखा गया है। इसके अलावा साइबेरिया, रूस व कजाकिस्तान में बसने वाला शिकारी परिंदा यूरेशियन हॉबी भी अभयारण्य में पहली बार दिखा है। इसका मुख्य भोजन यहां पाए जाने वाले मेंढक, छिपकली व गिलहरी सहित कीट- पतंगे हैं।
अब तक ये शिकारी पक्षी पहुंचे
क्षेत्रिय वन अधिकारी उमेश बागोतिया के मुताबिक नवम्बर माह के पहले सप्ताह की शुरूआत में बूटेड इगल, शॉर्ट टॉड इगल, स्नेक इगल, बोनोलिज इगल, मार्स हैरियर, टॉनी इगल, एडेड मांटिग्यू, ग्रेटर स्पॉटेड इगल, इंडियन स्पॉटेड इगल, फॉल्कन्स व बजर्डस की कई प्रजातियां अभयारण्य में डेरा डाल चुकी। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में सर्दी बढने के साथ ही इगल्स व वल्चर्स की कई प्रजातियां पहुंचेगी। पक्षियों को देखने के लिए इन दिनों देशी - विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ रही है। रेंजर के मुताबिक सितम्बर व अक्टूबर माह में करीब एक हजार पर्यटक अभयारण्य पहुंचे हैं।
