Wed, 07 22, 2026
देश

मोर्चरी में रखवाया शव, यार पता चलने पर सर पकड़कर फफक-फफक कर रोया बचपन का दोस्त:

सड़क दुर्घटना में हुई दोस्त की मौत

post-img

रोजमर्रा की तरह वह सड़क दुर्घटना में मृत युवकों के शव को मोर्चरी में रखवाने के बाद घर लौट आया। दो-तीन घंटे नींद लेने के बाद जब एक दोस्त का कॉल आया कि देवेन्द्र सिंह चारण अब नहीं रहा। सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गई, यह सुनते ही वह कांप उठा, पैरों तले मानो जमीन खिसक गई। शव उठाने के दौरान उसे भी नहीं पता था कि उन युवकों में एक उसका दोस्त देवेन्द्र भी था। शव को उठाने वाले अपने हाथों को देखते-देखते सिर पकड़ लिया और फफक-फफक कर रो पड़ा।

भोपों का बाड़ा निवासी देवेन्द्र सिंह चौहान ने शनिवार दोपहर पुष्कर में घटनास्थल पर पत्रिका से बातचीत में जानकारी साझा की। उसके अनुसार वह साहब की सूचना मिलने पर घटनास्थल पर पहुंच शवों को मोर्चरी में रखवाता है। तड़के हुए सड़क हादसे के बाद वह सूचना पर घटना स्थल पहुंचा और दोनों शव को गाड़ी में रखवाकर मोर्चरी में रखवा दिया। इसके बाद वह घर जाकर सो गया, लेकिन सुबह दोस्त सूरज का कॉल आया और यह सूचना दी तो विश्वास नहीं हुआ। जिन दोनों शवों को मोर्चरी में रखवाया उनमें से एक उनका खास दोस्त देवेन्द्र सिंह चारण था।शास्त्रीनगर स्थित एक निजी अस्पताल में काम करने वाले सूरज खाबेड़ को दोस्त की मौत पर विश्वास नहीं हुआ। करीब आठ घंटे बाद देवेन्द्र चौहान को लेकर घटना स्थल पर पहुंचा। दुर्घटना स्थल को देख उनकी अश्रुधारा फूट पड़ी। कुछ देर तक तो वह फूट-फूट कर रो पड़ा। क्षतिग्रस्त दीवार एवं मौके पर बिखरे बाइक के टुकड़ों को देख बस यही पूछता रहा कि अंकल कैसे हुआ हादसा? डम्पर वाला कौन था? पहले टक्कर मारी या सीधा डम्पर पलटा? रोते- बिलखते सूरज को साथी दोस्त ढांढस बंधाते रहे। सूरज ने बताया कि पांच माह पहले पिता की मौत हो गई थी। मृतक आश्रित के रूप में उसकी नौकरी की प्रक्रिया पूरी हो गई और दो महीने में जॉब लगने वाली थी। मेरे बचपन का यार था वह, साथ पढ़े भी। मुझे विश्वास नहीं हो रहा है।

Related Post