Wed, 07 22, 2026
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गांव-गांव तक पसर रहा डेंगू का डंक:

फैलने लगी बीमारियां, बढ़ रहे मामले, ग्रामीणों ने की फॉगिंग कराने की मांग

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शहर सहित क्षेत्र में इन दिनों डेंगू का रोग अपनी जड़ें पसारने लगा है। कस्बे में सरकारी व निजी जांचों के अनुपात में 10 से 20% तक बुखार के रोगियों में डेंगू होने की पुष्टि हो रही है। क्षेत्र में फैल रहे डेंगू के डंक को लेकर लोगों में भारी खौफ है। लोगों ने सभी जगह लगातार एक दिन के अंतराल में फॉगिंग करवाने की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कवाई कस्बे सहित आसपास क्षेत्र के गांवों में इन दिनों मौसम में हो रहे परिवर्तन के साथ ही डेंगू के रोगियों की संख्या मे भारी इजाफा हुआ है। कस्बे में संचालित निजी व सरकारी लैब असिस्टेंट की माने तो यहां दिन भर में होने वाली कल जांचों की संख्या में 10 से 20% लोगों के प्लेटलेट कम आ रही हैं। वहीं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि क्षेत्र में इन दिनों डेंगू के मच्छर का डंक कहर बरपा रहा है। हालांकि इलाज मिलने के बाद रोगियों के स्वास्थ्य में सुधार भी हो जाता है, लेकिन क्षेत्र में फैल रहे डेंगू के रोग को लेकर कस्बे व क्षेत्रवासी चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा यहां एक दिन छोड़कर दूसरे दिन फॉगिंग करना आवश्यक है। इससे कि डेंगू के मच्छर को खत्म किया जा सके। वर्तमान यहां ओपीडी की कुल सख्या करीब 400 से 500 के बीच चल रही है। इनमें ज्यादातर रोगी मलेरिया एव टाइफाइड बुखार के होते हैं।
लोग बोले-हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग
इस बार मौसम परिवर्तन के साथ खेल रहे मच्छर के कर पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फॉगिग नहीं करवाई गई है। ऐसे में कस्बेवासियों का कहना है कि हर घर में मच्छरों की भरमार है। कस्बे में जगह-जगह फैल रही गंदगी में अनगिनत मच्छर पनप रहे हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए स्वच्छता पर ध्यान नहीं देने से ग्राम पंचायत की भी उदासीनता साफ नजर आ रही है। फॉगिंग नहीं करवा कर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी मच्छरों द्वारा दिए जा रहे डंक में मानों सहयोग पैदा कर रहे हैं।
स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा बढ़ा, पद नहीं
कस्बे के सरकारी अस्पताल का पिछले सालों दर्जा बढ़ाकर उप स्वास्थ्य केंद्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परिवर्तन करने के बाद सुविधा तो बढ़ी, पर यहां कार्यरत कर्मचारियों के पद नहीं बढ़े। ऐसे में यहां पहुंचने वाले रोगियों को भी पूरा लाभ नहीं मिल रहा। इस स्वास्थ्य केंद्र में कुल 5 चिकित्सक, 8 नर्सिंग ऑफिसर, 1 फार्मासिस्ट, 1 लेब टेक्नीशियन, 1 महिला एएनएम, 1 एलएचवी, के पद स्वीकृत है। जो यहां की ओपीडी, डिलीवरी, जनरल वार्ड व 24 घंटे इमरजेंसी सेवाओं को सुचारू रखने के लिए नाकाफी है। वर्तमान में यहां एक चिकित्सक का पद भी पिछले कई महीनों से रिक्त है।
नर्सिंग ऑफिसर की कमी से बिगड रही व्यवस्था
कस्बे के स्वास्थ्य केंद्र पर वैसे तो कहने को कुल 8 नर्सिंग ऑफिसर कार्यरत हैं। जिनमें से दो सीनियर नर्सिंग ऑफिसर होने के कारण उन्हें एक को टीबी का व दूसरे को दवा का चार्ज दिया है। ऐसे में इनडोर, ओपीडी व प्रसव वार्ड में ड्यूटियां सिर्फ 6 नर्सिंग ऑफिसरों की ही लगाई जाती है। स्वास्थ्य केंद्र पर ओपीडी संख्या व अतिरिक्त समय आने वाले रोगियों एवं ड्यूटी चार्ट को देखते हुए यहां नर्सिंग ऑफिसरों की संख्या एक दर्जन होनी चाहिए। ऐसे मे स्वास्थ्य केन्द्र की व्यवस्था बनाने के लिए ग्रामीण सब सेंटरों पर कार्यरत मेल नर्सिंग स्टाफ से इमरजेंसी में काम करवाया जा रहा है।
जगह की कमी, इमरजेंसी पेशेंट परेशान
स्वास्थ्य केंद्र परिसर में चिकित्सकों के रहने की क्वार्टर्स की कमी के चलते यहां पहुंचने वाले इमरजेंसी मरीज कई बार परेशान होते हैं। वैसे तो स्वास्थ्य केंद्र पर पांच चिकित्सकों के पद हैं। इनमें से चार चिकित्सक के पद वर्तमान में भरे हैं, लेकिन एक भी चिकित्सक चिकित्सा परिसर में नहीं रहता। जिसका मुख्य कारण यहां जगह की कमी होने के चलते चिकित्सकों के रहने की व्यवस्था नहीं होना है। ऐसे में इमरजेंसी में यहां पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सक के आने का इंतजार करना पड़ता है।

 

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