नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से हो रही घुसपैठ को लेकर केंद्र कड़ा रुख अख्तियार कर सकती है। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने घुसपैठ करने का अपना रवैया बंद नहीं किया, तो भारत सरकार के पास उसके खिलाफ कार्रवाई करने के सभी विकल्प खुले हैं।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय सीमा में ये घुसपैठ पाकिस्तानी सेना के समर्थन के बिना नहीं हो सकते क्योंकि ये सभी क्षेत्र उनके द्वारा संचालित और नियंत्रित होते हैं। उन्होंने कहा कि घात लगाकर हमला करने में माहिर इन भारी प्रशिक्षित आतंकवादियों को जंगल के अंदर पाकिस्तानी सेना के सपोर्ट फायर के साथ भेजा जाता है। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि अपनी सीमाओं को बचाने के लिए हमारे पास तत्काल प्रभाव से संघर्ष विराम समाप्त करने का विकल्प है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बहुत खराब चल रही है और उनके आंतरिक मंत्रालय को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के रखरखाव के लिए रक्षा मंत्रालय को भारी शुल्क देना पड़ता है जो इन दिनों कुछ भी नहीं है।
पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान में 1971 जैसी कार्रवाई:
सूत्रों ने बताया कि हमारे पास दूसरा विकल्प यह है कि हम उनके लॉन्चिंग कैंपों पर हमला करें जहां ये घुसपैठिए बैठे हैं और अपनी सीमाओं को बचाने के लिए उनके क्षेत्र में घुसपैठ करें। इसी तरह से, तीसरा रास्ता यह है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान (जीबी) क्षेत्र में रहने वाले लोग रो रहे हैं और भारत के साथ विलय की मांग कर रहे हैं और ऐसे में उनकी आवाज का समर्थन नहीं किया जा सकता जैसा कि हमने 1971 में किया था। ‘पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी विकल्प से इनकार नहीं। सूत्रों की मानें, तो पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार पूर्ण विचारधारा वाली सरकार है और इस जनादेश के साथ वे कोई भी सख्त कदम उठाने की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विकल्प से इनकार नहीं किया जा सकता और राजनीतिक नेतृत्व के आश्वस्त होने के बाद हम किसी भी चीज के लिए तैयार हैं।
