Wed, 07 22, 2026
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50 लाख रुपए की मशीन पर छाई धूल:

शहर की सड़कों को चमकाने के लिए मंगवाई थी : कुछ दिन ही हो पाई सफाई

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शहर में सड़कों पर जमी गर्द की सफाई के लिए मंगवाई गई करीब 50 लाख रुपए की रोड स्वीपर मशीन पर ही धूल जमी हुई है। नगरपरिषद को रोड स्वीपर मशीन तकरीबन डेढ़ साल पहले डीएलबी की ओर से दी गई थी। मशीन आने के बाद कुछ दिन तो सफाई हुई उसके बाद अब नगरपरिषद में खड़ी है। इसका इस्तेमाल नहीं होने के कारण मशीन खराब होने लगी है, बल्कि जिम्मेदारों की व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहा है। नगरपरिषद ने शहर की सफाई व्यवस्था अत्याधुनिक तरीके से कराने के लिए रोड स्वीपर मशीन की मांग डीएलबी से की थी। करीब एक-डेढ़ साल पहले लगातार हुए पत्राचार एवं पैरवी के बाद डीएलबी ने इसकी स्वीकृति जारी की। इसके बाद डीएलबी ने खुद के स्तर पर रोड स्वीपर मशीन खरीदने के बाद नगरपरिषद को हस्तांतरित किया, ताकि शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार आ सके। मशीन आने के बाद नगरपरिषद ने शहर की सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद करने का दावा किया था। उस दौरान अधिकारियों का कहना था कि अब शहर पूरी तरह से क्लीन नजर आएगा, लेकिन दावे फेल साबित हो रहे हैं। दावों के एक साल बाद भी शहर के सभी प्रमुख मार्ग एवं चौराहे दिन भर उड़ती धूल से अटे रहते हैं, जबकि रोड स्वीपर मशीन नगरपरिषद के अग्निशमन कार्यालय में खड़ी है। जानकारों ने बताया कि इस रोड स्वीपर मशीन से सड़क पर जमी धूल को पूरी तरह से क्लीन किया जा सकता है। इस मशीन का इस्तेमाल शहर के गढ़ परिसर से लेकर मोटर गैराज, बस स्टैंड परिसर, कॉलेज रोड, मूर्ति चौराहे से मामा-भांजा तक, सिटी फोन लेन खंडिया से लेकर केवीके तक आदि क्षेत्रों में सफाई की जा सकती है।

ऐसे काम करती है मशीन

विशेषज्ञों के अनुसार इसमें स्पीड एयर सिस्टम से धूल को साफ किया जाता है। इसमें एक ब्रश भी लगा रहता है। धूल हटाने के साथ ही यह सड़कों को पूरी तरह से क्लीन करती चलती है। इसमें इस्तेमाल होने वाली एयर स्पीड इतनी अधिक रहती है कि सड़क पर से धूल पूरी तरह से गायब हो जाती है। इस मशीन का उपयोग करने पर सफाई कर्मियों पर सफाई कार्य का भार काफी हद तक कम हो जाता है।

 

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