विधानसभा चुनाव के दौरान बाड़मेर जिले के अंतिम सरहदी गांवों के मतदाता ऊंटों से दूरदराज मतदान केंद्र पहुंचेंगे। ध्यान रहे कि सीमावर्ती क्षेत्र के सुंदरा, रोहिड़ी, बिजावल, द्राभा,ख़बड़ाला, रतरेड़ी कला, बंधड़ा और रोहिड़ाला ग्राम पंचायतों में ऐसे कई स्थान हैं, जहां मतदाताओं को बूथ तक पहुंचने के लिए ऊंट या ट्रैक्टर का सहारा लेते हैं। विधानसभा चुनाव 2018 में दो दर्जन से अधिक पोलिंग बूथ पर पोलिंग पार्टियां ऊंटों पर सवार होकर पहुंची थी। इस बार हालांकि अभी तक इसकी सूचना साझा नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक अमला जानता है कि धोरे पार करने के लिए ऊंट जरूरी होगा।
हमारे झणकली से ऊनरोड, झणकली से जानसिंह की बेरी, दूधोड़ा, बालेबा, भाडली व नीमली जाने के लिए अभी भी ऊंटों या टैक्ट्रर का सहारा लेना पड़ता है। कुछ जगह ग्रेवल सड़कें बनाई गईं, लेकिन वो भी रेत में दब गईं या बरसात में टूट कर बिखर गई हैं। - मांगीदान चारण, वाहन चालक, ग्राम पंचायत झणकली
हमारे गांव गड़स तक पहुुंचने के लिए आज भी ऊंट, ट्रैक्टर या फॉर बाई फॉर गाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है। मतदान के दिन पोलिंग बूथ तक पैदल या ऊंटों पर जाना होता है। इस वजह से कई लोग मतदान ही नहीं करते हैं।
- गेनसिंह सोढ़ा, निवासी गड़स, ग्राम पंचायत बिजावल
नेता वोट के समय जरूर याद करते हैं। बाद में कोई नही आता। इस कारण गांवों में विकास सपना बना हुआ है। सड़क, पानी, बिजली ये तीन सुविधाएं तो दें। -भूरसिंह सोढ़ा, पाक विस्थापित, ग्रामीण सिरगुवाला।
