विधानसभा चुनाव की रणभेरी बज गई है। इसके के साथ कई विकास प्रोजेक्ट भी कागजों से बाहर नहीं आ पाएंगे। नए कामों के लिए टेंडर नहीं होंगे। इसके अलावा आचार संहिता में कई अन्य निर्देश भी लागू हुए हैं जिसके तहत विकास नहीं दौड़ पाएगा।
नगर निगम नए टेंडर नहीं कर सकेगा
नगर निगम की ओर से नए वार्डों में काम लगाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। अब उन वार्डों में काम के लिए टेंडर नहीं हो सकेंगे। सफाई आदि के लिए नए संसाधनों की खरीद नहीं हो सकेगी। सड़कों के निर्माण के लिए नए टेंडर नहीं किए जा सकेंगे। इसी तरह पीडब्ल्यूडी भी नए कार्य नहीं कर पाएगा। हालांकि नगर निगम क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी की ओर से करीब 20 करोड़ से सड़कें बनाई जा रही हैं। ये काम चलता रहेगा।
कंपनी बाग की बेसमेंट पार्किंग नहीं बन पाएगी
यूआईटी की ओर से कन्वेंशन सेंटर बनाने का प्रस्ताव था। इसके अलावा कंपनी बाग में बेसमेंट पार्किंग का प्रस्ताव भी अटक गया। इसका नया टेंडर नहीं हो पाया और न वर्क ऑर्डर जारी हुआ। इसी तरह एलिवेटिड रोड भी स्मार्ट सिटी का हिस्सा था जो केवल सरकार तक ही पहुंच पाया। सामान्य व महिला अस्पताल को जोड़ने के लिए बनाया जाने वाला अंडरपास भी अभी अटका हुआ है। आचार संहिता के चलते अब ये काम नहीं हो पाएंगे।
फूूड पैकेट व मोबाइल भी अटके
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होने के साथ ही सरकार की ओर से मुख्यमंत्री की फोटो लगे फूड पैकेट का वितरण भी अटक गया है। वहीं महिलाओं के वितरित किए जा रहे मोबाइल पर भी ब्रेक लग गया है।
विधायक निधि के काम अटके
विधायक व सांसद निधि के जरिए विकास कार्यों के प्रस्ताव जिला परिषद को भेजे गए थे लेकिन करीब 200 प्रस्तावों को वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई। इन कामों के टेंडर नहीं हो सकेंगे। ये कार्य सड़क, नाली आदि के हैं। इन कामों को पास करवाने के लिए विधायकों ने कई बार अफसरों पर दबाव बनाया लेकिन स्वीकृतियों की चाल धीमी रही। इससे नेताओं की धड़कने बढ़ रही हैं।
