रियासतकालीन समय में बड़ीखाटू नागौर जिले का सबसे बड़ा कस्बा रहा है। आजादी से पहले ब्रिटिश काल में अंग्रेजों ने सूचनाएं आगे से आगे पहुंचाने के लिए बड़ीखाटू में डाकघर खोला था। इसके पीछे कारण था बड़ीखाटू का पश्चिम शहरों से सीधा दिल्ली से जुड़ा होना। इस कस्बे का रेलवे के माध्यम से सीधा सम्पर्क था। यहां दिल्ली मेल ट्रेन का ठहराव होता था। सभी तरह के सरकारी कार्यालय केवल बड़ी खाटू में ही थे।
जानकारी के अनुसार कागज, चिठ्ठी , सूचना, पुलिस के कागजात सहित कई दस्तावेज इसी स्टेशन पर आते थे। यहां से ऊंट व घोड़ों के माध्यम से पोस्टमैन डाक लेकर नागौर ,कुचेरा , मूंडवा ,जायल सहित कई क्षेत्रों में इन दस्तावेजों को आगे पहुंचाते थे। उसके बाद यहां से गांव- गांव में डाकिया पत्र वितरण करके सूचना पहुंचाने का कार्य करता था। जानकारी के अनुसार बड़ीखाटू जिले का पहला डाक घर था, जो रिले केन्द्र के नाम से जाना जाता था।
अब तक किराये के मकानों में चल रहा डाकघर
गांव के बुजुर्ग बताते है कि यह डाक घर सबसे पहले पहाड़ी पर स्थित एक मकान में खोला गया था जो लम्बे समय तक किराये पर चला। उसके बाद पहाड़ी पर स्थित हरिश्चन्द्र कोठारी के मकान में 45 वर्ष तक किराये पर चला, जिसे बाद में खाली करवा दिया तो तीन वर्ष तक इस्माइल काजी के मकान में संचालित रहा। उसके बाद सदर बाजार स्थित पुरानी पंचायत में शिफ्ट हुआ। यह डाकघर 1997 में रेलवे स्टेशन रोड स्थित एक किराये की दुकान में शिफ्ट हो गया।
