प्रदेश और जिले में इस साल नया सत्र शुरू होने के साथ ही शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्य में ड्यूटी लगा दी। इससे शिक्षक सरकारी स्कूल में पहुंचे की जगह राज्य सरकार की ओर से संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों में अपनी ड्यूटी दे रहे हैं। वहीं राज्य सरकार की ओर से आयोजित शहरी और ग्रामीण ओलंपिक खेलों के समाप्त होने के बाद शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय खेलों में अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं। इससे शिक्षक और विद्यार्थियों का आधे से अधिक समय खेलकूद प्रतियोगिताओं में गुजर गया। अब विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। ऐसें में शिक्षक चिंतित हैं कि चुनाव कराएं या विद्यार्थियों को पढ़ाएं। चुनावों में शिक्षा विभाग की भूमिका अहम होती है।
अब शिक्षक भी दिखाएंगे खेलों में अपनी प्रतिभा : शिक्षा विभाग की ओर से खेलों में शिक्षकों की प्रतिभा को सभी के सामने लाने के लिए 28 से 29 नवम्बर को जिला स्तरीय शिक्षक खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इसमें महिला शिक्षकों को बिना तहसील स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिए सीधे ही जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का प्रावधान है। साथ ही राज्य स्तरीय शिक्षक खेलकूद प्रतियोगिताएं 30 से 31 दिसम्बर को होंगी।
परिणाम प्रभावित होने पर शिक्षा विभाग थमाता है नोटिस
जिले में नया सत्र शुरू होने के साथ ही शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लगाने के कारण कई सरकारी स्कूलों में समय पर कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं। इससे शिक्षक और विद्यार्थी दोनों प्रभावित हो रहे हैं। चुनावों से पहले शिक्षकों की 67 से अधिक कार्यों में ड्यूटी लगाई गई और अब विभागीय आदेश के अनुसार चुनावों और खेलों में ड्यूटी लगाई गई है। इसका असर परिणाम पर होगा। वहीं शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल का अच्छा परिणाम नहीं आने पर शिक्षकों को नोटिस थमाया जाता है, इससे शिक्षक चिंतित हैं।
