प्रोपर्टी में जुलाई महीने तक जबरदस्त बूम आया। कहीं भूखंड लोगों ने खरीदे तो कहीं फ्लैट। इन्वेस्टर्स खूब देखे गए। पंजीयन कार्यालय भी गुलजार रहा। अफसर भी रजिस्ट्री करते-करते हांफने लगे थे लेकिन अब यही प्रोपर्टी में आया बूम 25 फीसदी तक गिर गया। पंजीयन कार्यालय में रजिस्ट्रियों की संख्या में काफी कमी आ गई। विभाग के अलावा एक्सपर्ट इसका कारण नए जिलों का उदय व आचार संहिता लगना मान रहे हैं।
इन क्षेत्रों में भूखंडों की हो रही थी बिक्री : शहर से सटे एरियों में भूखंडों की बिक्री काफी हो रही थी। दिल्ली, जयपुर, बहरोड़ व तिजारा मार्ग पर आबादी बस रही थी। बिल्डर भी इन मार्गों पर फ्लैट बना रहे थे। अब उन्हें भी ग्राहक ढूंढने में पसीने आ रहे हैं। नए बिल्डर भी कुछ मार्गों पर अपना कारोबार शुरू किए थे। वहां भी फ्लैटों की बुकिंग शुरू हुई थी। एक्सपर्ट कहते हैं कि अभी नवरात्र, दिवाली का सीजन है। ऐसे में कुछ भूखंडों की बिक्री हो रही है। पर्व समाप्ति के बाद इनकी संख्या में और कमी के आसार हैं।
नए जिलों में पलायन कर रहे बिल्डर : पहले अलवर में 16 ब्लॉक थे। जिले के आखिरी कौने में बैठे लोग भी जिला मुख्यालय पर घर बनाने के लिए यहां जमीन आदि खरीद रहे थे लेकिन अब उनका जिला मुख्यालय अलग हो गया। ऐसे में यहां इन्वेस्ट कम हो गया। बिल्डर भी उन क्षेत्रों में नए पनप गए। कोटपूतली-बहरोड़ पूरी तरह दिल्ली मार्ग पर बसा हुआ है। ऐसे में लोग हाइवे के किनारे घरों की तलाश में हैं। खैरथल-तिजारा में भी बिल्डरों ने भूखंडों की बिक्री शुरू कर दी। रेट भी वहां जमीन के 40 फीसदी तक बढ़ गए। बताते हैं कि यहां काम कर रहे बिल्डर भी नए जिलों की ओर पलायन कर गए। नए जिलों में जमीन की खरीद-फरोख्त अधिक हो रही है।
एक्सपर्ट कहते हैं कि जमीन खरीदनी हो या फिर फ्लैट या मकान लेना हो। ये खरीद-फरोख्त अधिकांशत दो नंबर में अधिक होती है। ऐसे में लोग नकदी लेकर निकलते हैं। इस समय आचार संहिता लगी है। लोग नकदी लेकर निकलेंगे तो कहीं न कहीं जांच में पकड़े जाएंगे और ऐसे में वह इस पैसे का हिसाब नहीं दे पाएंगे। आयकर विभाग की भी नजर ऐसे पैसों पर है। इसलिए भी जमीन की खरीद कुछ दिन में कम होने की संभावना है।
