फेफड़ों का काम न केवल शरीर को चलाने के लिए ऑक्सीजन लेना और अंदर मौजूद कार्बन डाइ ऑक्साइड को छोड़ना है बल्कि खून को भी शुद्ध करना है। हर दिन एक व्यक्ति करीब 10 हजार लीटर सांस लेता है। इसमें 500 लीटर ऑक्सीजन होती है। यही ऑक्सीजन खून को शुद्ध करने का काम करती है। इसलिए फेफड़ों की सुरक्षा और उसकी सेहत का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी होता है।
कौन लोग हर रोज लें स्टीम
जहां का प्रदूषण स्तर 100 एक्यूआई से ज्यादा है वहां के लोगों को हर रोज सोने से पहले पांच मिनट स्टीम लेना चाहिए। स्टीम फेफड़ों में चिपके प्रदूषण के छोटे-छोटे कणों को साफ कर फेफड़ों की सफाई करता है।
बाहर का ही नहीं घर का प्रदूषण भी खतरनाक
हर बड़े शहरों में तेजी से बढ़ता प्रदूषण फेफड़ों की सेहत के लिए खतरा है। यही नहीं घर का प्रदूषण भी खतरनाक होता है। धुएं वाली मच्छर मार अगरबत्ती आठ घंटे में 20 सिगरेट जितना धुआं छोड़ती है। इसी तरह कोयले की भट्टी और चूल्हे पर खाना बनाने वाले करीब 100 बीड़ी जितना धुआं अंदर लेते हैं। घर में सीलन और डस्ट से भी फेफड़ों की समस्या होती है।
हाई रिस्क लोग कौन हैं?
जिन शहरों में प्रदूषण का स्तर 100 से अधिक, चूल्हे या भट्टी पर खाना बनाने वाले, लकड़ी, चूड़ियों, ग्लास, सीमेंट, पत्थर, रुई से जुड़े बिजनेस में काम करने वालों के फेफड़ों में इसके छोटे-छोटे कण जाकर सांस नलियों को बंद करते हैं। नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे लोगों को हर वर्ष फेफड़ों की क्षमता वाली जांच पीएफटी करवानी चाहिए। इससे बीमारी की पहचान जल्दी हो जाती है।
तनाव होने पर डीप ब्रीदिंग करें
तनाव से स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे फेफड़ों में सूजन और सिकुड़न की समस्या होती है। सदमे की खबर से अस्थमा अटैक इसके उदाहरण हैं। इसलिए तनाव महसूस हो तो डीप ब्रीदिंग शुरू कर दें।
जानवरों को घर के अंदर नहीं रखें
जानवरों और चिड़ियों के फर-बालों से भी फेफड़ों में दिक्कत होती है। अगर शौक है तो उन्हें घर से बाहर रखें। अगर बाहर व्यवस्था नहीं है तो बॉलकनी में रखें।
