राज्य सरकार की ओर से सितंबर 2023 की बजट घोषणा में शामिल कामधेनू पशु बीमा योजना एक दिन चलकर ही ठप हो गई। इसकी वजह है कि योजना की शुरुआत के अगले दिन पशुचिकित्सक हडताल पर चले गए। यह हड़ताल अब खत्म हो चुकी हैं, इसके बाद भी यह योजना फिर से शुरू नहीं हो पाई है। इसकी वजह है कि सरकार अभी यह तय नहीं कर पाई कि बीमा कौनसी कंपनी करेगी। इतना ही नहीं पशुपालन विभाग के पशुधन सहायकों को प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। अलवर जिले में करीब 13 लाख पशु हैं, जिनमें ज्यादातर का बीमा नहीं हो पाया है।
बीमित पशु की अकाल मृत्यु पर मिलेंगे 40 हजार : इस योजना के तहत पशुपालकों को दो- दो दुधारू पशुओं का बीमा कराए जाने की सुविधा दी गई थी। इसमें गाय व भैंस दोनों को शामिल किया गया हैं। बीमित पशु की अकाल मृत्यु होने पर 40 हजार रुपए दिए जाने का प्रावधान है। पहले दिन अलवर जिले में ब्लॉक स्तर पर 20 - 20 पशुओं का बीमा हुआ था।
कामधेनु बीमा योजना शुरू होने के बाद एक ही दिन चल पाई। योजना के एक दिन बाद ही पशु चिकित्सक भी हड़ताल पर चले गए। इसके बाद से बीमा काम बंद है। हाल ही में एक आदेश आया था जिसमें पशुधन सहायक को बीमा संबंधी काम का प्रशिक्षण दिया जाना था वह भी अभी नहीं हुआ है क्योंकि कोई बीमा कंपनी ही तय नहीं हैं।
डा. राजेश गुप्ता, उपनिदेशक, बहुउदेश्यीय पशु चिकित्सालय
