छिपकलियों के पैरों की बनावट एक अजीब तरह की होती है। उनके पैरों में छोटे-छोटे वैक्यूम होते हैं। उनकी संख्या काफी अधिक होती है,जो आसानी से दीवारों पर चिपक जाते हैं। इनकी सहायता से छिपकली दीवारों पर आसानी से चल लेती हैं और गिरती नहीं है। इसी कारण से छिपकलियां दीवारों से गिरती नहीं हैं।
दुनिया में छिपकली की 5 हजार से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। अगर कोई छिपकली पर हमला करता है तो वह अपनी पूंछ को अपने शरीर से अलग कर दुश्मन का ध्यान भटकाती है, ताकि वह वहां से भाग पाए। कुछ छिपकलियों की प्रजातियां सांप की तरह दिखती हैं।
छिपकलियां अपनी आंखों से एक ही समय में बाएं-दाएं देख सकती हैं। छिपकली की कुछ प्रजातियां अपनी रक्षा के लिए अपनी आंखों से खून के फव्वारे छोड़ती हैं। छिपकलियों की आंखों की पलकें नहीं होती हैं। दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक छिपकली कोमोडो ड्रेगन को माना है। इसकी लंबाई लगभग 10 फीट और वजन 70 किलोग्राम तक होता है। कोमोडो ड्रैगन पर्यावरणीय रूप से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। ये इंडोनेशिया के द्वीप समूहों पर पाई जाती हैं। यह जहरीली नहीं होती, लेकिन इनकी लार में अनेक प्रकार के वायरस और जीवाणु पाए जाते हैं। जिसके कारण इसके काटने से मृत्यु का खतरा बना रहता है। फ्रिल्ड नैक लिजार्ड ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी के टापुओं पर पाई जाती हैं। इसे मोनेस्टर लेजार्ड भी कहते हैं। इसकी गर्दन के चारों और झालरनुमा संरचना पाई जाती है। छेड़े जाने पर यह अपनी झालर को फुला लेती है और छोटे शत्रुओं की ओर तेजी से भागती है, जिससे यह बड़ी और डरावनी लगती है।
