वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मार्च 2023 में आखिरी बार बाघ टी-136 के एमपी के कूनो अभयारण्य के नजदीक पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि इसके बाद भी एमपी का वन विभाग बाघ को टे्रस नहीं कर सका था। अब इस बात को भी करीब सात माह का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बाद भी अब तक राजस्थान व एमपी दोनों ही राज्यों के वनाधिकारियों को बाघ का कोई सुराग नहीं लग सका है।
रणथम्भौर में अगस्त 2022 से बाहर है बाघ
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 14 अगस्त 2022 के करीब बाघ टी-136 व बाघ टी-132 दोनों टेरेटरी की तलाश में रणथम्भौर की तालडा और आरओपीटी रेंज से निकलकर लालपुर उमरी होते हुए करौली के कैलादेवी अभयारण्य में पहुंच गए थे। बाघ टी-132 ने जहां काफी दिनों तक कैलादेवी अभयारण्य में ही आशियाना बना लिया था। कई माह के बाद बाघ टी-132 कैलादेवी से वापस रणथम्भौर की तालडा रेंज में वापस आ गया था। वहीं बाघ टी-136 कुछ दिनों के बाद करौली के कैलादेवी अभयारण्य से निकलकर पहले धौलपुर व उसके बाद एमपी के मुरैना के जंगलों में चला गया था।
नवम्बर 2022 में वापस धौलपुर आया था बाघ
एमपी के जंगलों की खाक छानने के बाद बाघ टी-136 नवम्बर 2022 में एक बार फिर से धौलपुर लौट आया था। हालांकि कुछ दिनों के बाद बाघ के एक बार फिर से एमपी की ओर जाने की जानकारी मिली थी।
इसके बाद मार्च 2023 में बाघ टी-136 के एमपी के कूनो अभयारण्य में चीता एनक्लोजर के नजदीक पहुंचने की संभावना भी जताई गई थी। उस समय चीतों के एनक्लोजर से महज पांच किमी दूर बाघ के पगमार्क भी मिले थे, लेकिन एमपी का वन विभाग बाघ को ट्रेस नही कर सका था।
