सरकारी स्कूलों के बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए सरकार समय पर जारी करती है लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव के चलते ड्रेस फंस गई। यही कारण है कि आधा शैक्षिक सत्र बीतने के बाद भी 2.81 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिल पाई। कुछ स्कूलों के पास पुरानी यूनिफॉर्म रखी थीं जो बच्चों को बांट दी गई। बाकी बच्चे पिछले साल मिनी यूनिफार्म पहनकर ही आ रहे हैं। कुछ बच्चों की ये ड्रेस फट गई। अभिभावक इंतजार कर रहे हैं कि सरकार की ओर से ड्रेस मिलेगी या फिर वह खुद अपने स्तर से सिलवाएं। शिक्षा विभाग का कहना है कि इसके लिए आदेश जारी नहीं हुए।
जिले में संचालित 2782 स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के 2 लाख 81 हजार 898 विद्यार्थियों को निशुल्क ड्रेस वितरित की जानी थीं लेकिन इस ओर अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय एसएमडी की प्रधानाचार्य सीमा शर्मा ने बताया कि सत्र 2023-24 के लिए किसी भी कक्षा के लिए पोशाक नहीं आई हैं। विद्यार्थियों को पोशाक भामाशाहों की ओर से वितरित की गई हैं।
पिछले साल भी लेट मिली थी यूनिफार्म : जिले के विद्यार्थियों को पोशाक के लिए अभी भी दो-तीन माह का और इंतजार करना पड़ सकता है। विधानसभा चुनावों के कारण पोशाक के टेंडर और वितरण का कार्य प्रभावित हुआ है। अब नि:शुल्क पोशाक वितरण कार्य की प्रक्रिया चुनाव के समापन के बाद शुरू होगा। बताते हैं कि पिछले साल भी विद्यार्थियों को नि:शुल्क पोशाक का वितरण सत्र समापन के नजदीक हुआ था जबकि पिछली बार चुनाव नहीं थे।
गिने-चुने विद्यार्थियों को ही मिली पोशाक : जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले गिने-चुने विद्यार्थियों को ही पोशाक मिली हैं। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर दयाल मीणा ने बताया कि जिले के सभी ब्लॉकों के सरकारी स्कूलों में पिछले साल की पुरानी पोशाकों का वितरण किया गया है। स्कूली पोशाक के लिए अभी कोई आदेश नहीं आए हैं। आचार संहिता के चलते पोशाक वितरण का कार्य रुका हुआ है।
