जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में आंतरिक व्याख्यानमाला के अंतर्गत प्रो. रेखा तिवारी ने 'अंग्रेजी साहित्य में नैतिकता तथा आध्यात्मिकता' विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि नैतिकता और आध्यात्मिकता दर्शनशास्त्र से संबंधित विषय हैं। नैतिकता किसी भी समाज को परिष्कृत करती है। नैतिकता हमें एक अच्छा इंसान बनाने में सहायक है। अध्यात्म द्वारा हम आत्मोत्थान की ओर अग्रसर होते हैं। प्रो. तिवारी ने बताया कि अंग्रेजी साहित्य में एरिस्टोटल, लिओ टॉलस्टॉय, विलियम वर्ड्सवर्थ, टीएस इलियट, डबल्यूबी यट्स आदि ने अपनी साहित्यिक रचनाओं में नैतिकता और आध्यात्मिकता के बारे में विस्तृत उल्लेख किया है। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने भी कहा कि धर्म हमें अध्यात्म से जोड़ता है। आजकल धर्म और संप्रदाय शब्दों में विभेद की अनभिज्ञता के कारण लोग धर्म के वास्तविक मर्म को न समझते हुए इसे संकीर्ण अर्थों में समेटकर अपने कुुत्सित स्वार्थों की सिद्धि चाहते हैं, जबकि धर्म का संबंध परोपकार के भाव को ग्रहण करते हुए सीधे-सीधे आत्म शुद्धि से है, जो कि एक महान एवं उदार दृष्टिकोण की श्रेष्ठतम अभिव्यक्ति है। इस दौरान डॉ. प्रगति भटनागर, अभिषेक चारण, श्वेता खटेड़, मधुकर दाधीच, अनूप कुमार, घासीलाल शर्मा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन इतिहास व्याख्याता प्रेयस सोनी ने किया।
