Wed, 07 22, 2026
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रणथम्भौर: एक साल में 20 प्रतिशत बढ़ गया बाघ-बाघिन का कुनबा:

एक साल में 15 शावकों का हुआ जन्म, पर्यटकों को लुभा रही अठखेलियां

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रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यानकी आबोहवा बाघ-बाघिन को खूब रास आती है। पिछले एक साल में रणथम्भौर में बाघों के के कुनबे में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे वन्य प्रेमियों में खुशी की लहर है। वन्यजीव विशेषज्ञों की माने तो यह रणथम्भौर में बाघों की संरक्षण की दिशा में किए जा रहे सकारात्मक प्रयास का नतीजा है। पूर्व में साल 2004-05 जब देश के विभिन्न टाइगर रिजर्व में टाइगरों की संख्या में बड़ी कमी आई थी। इस दौरान कई टाइगर रिजर्व में टाइगर भी खत्म हो गए थे। उस समय रणथम्भौर में बाघों की संख्या में काफी कमी और यहां भी आधे बाघ ही बचे थे। तब यहां यहां 24 टाइगर थे। देश में घटती बाघों की संख्या को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रणथम्भौर आए थे। बाघों की घटती संख्या को सरकारों ने गंभीरता से लिया। इसके बाद टाइगर प्रोजेक्टों की संख्या और यहां संसाधनों को बढ़ाया गया। इसके चलते रणथम्भौर में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ।

एक साल में बढ़ा 25 प्रतिशत बाघों का कुनबा : रणथम्भौर में एक साल में 25 प्रतिशत बाघों का कुनबा बढ़ा है। फिलहाल रणथम्भौर में 81 टाइगर है। इनमें से पिछले एक साल 15 शावकों का जन्म हुआ है। इनमें बाघिन टी-84 यानि एरोहैड ने 3 शावक, टी-107 ने 3 शावक, टी124 यानि रिद्धी ने तीन शावक को जन्म दिया है। इसके चलते रणथम्भौर अभयारण्य में बाघों के कुनबे में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

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