आगामी विधानसभा चुनाव के चलते कई वांटेड की धरपकड़ में नागौर पुलिस फिसड्डी साबित हो रही। ये वो वांटेड बताए जो अन्य राज्यों में अपराध करने के बाद नागौर को अपनी शरणस्थली बना रहे। एडीजी (अपराध) दिनेश एमएन ने इन अपराधियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए पत्र भेजा है। वैसे कमोबेश सभी जिला एसपी से उनके यहां छिपे बदमाशों को जल्द गिरफ्तार करने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार विधानसभा चुनाव को अब करीब एक माह ही बाकी है। बाहरी राज्यों में अपराध करने के बाद अपने मूल जिले नागौर में रह रहे बदमाश हों या नागौर जिले में अपराध करने के बाद अन्य राज्यों के वांछित अपराधी। ये सभी पुलिस की रडार पर हैं। मजे की बात यह कि कई दिनों की मशक्कत के बाद भी ये बदमाश पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए हैं। एडीजी ने अपने पत्र में कहा कि पूर्व में महानिदेशक के दिए गए निर्देश के मुताबिक कोई कार्रवाई नहीं हो रही। महानिदेशक के मध्यप्रदेश से फरार चल रहे डेढ़ दर्जन वांटेड को पकडऩे के लिए पहले ही आदेश दिए थे। बावजूद इसके अभी तक इसमें एक भी पुलिस के हाथ नहीं लग पाया। यहां बताते चलें कि मध्यप्रदेश पुलिस और सरकार ने इनके बारे में करीब दो महीने पहले ही राजस्थान सरकार को अवगत करा दिया था।
सूत्रों का कहना है कि बाहरी राज्यों में अपराध करने के बाद अपने नागौर जिले में फरारी काट रहे बदमाशों की संख्या सौ से अधिक बताई जा रही है। इनमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र आदि राज्य की पुलिस की सूची में ये सभी वांटेड चल रहे हैं। अभी चुनाव मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में भी है, ऐसे में वहां की पुलिस नागौर में छिपे फरारी अपराधियों को दस्तयाब कर उनके हवाले करने की बात कर रही है। मध्यप्रदेश से फरार चल रहे सभी डेढ़ दर्जन अपराधी मूलत: नागौर के रहने वाले हैं। इन पर हत्या/बलात्कार/लूट जैसे मामले दर्ज हैं। एडीजी (अपराध) के इस पत्र ने पुलिस के काम को और बढ़ा दिया है।
नागौर जिले में वारदात कर दूसरे राज्य में रहने वाले अपराधी/भगौड़ा हो या फिर यहां के थानों में दर्ज अपराध करने वाला किसी दूसरे शहर का शातिर। इनकी संख्या करीब 11 सौ के आसपास है। दूसरे राज्य में 67 भगौड़े समेत 526 तो अन्य जिलों में इनकी संख्या छह सौ से अधिक है। इन सभी की गिरफ्तारी/डिटेन कार्रवाई के लिए संबंधित डीजीपी के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों के एसपी को पहले ही डिटेल भेजी जा चुकी है। नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले में इस समय करीब 409 हिस्ट्रीशीटर हैं। इतने ही वो बदमाश भी हैं जिनका आपराधिक रेकॉर्ड भले ही गंभीर ना हो पर चुनाव के दौरान अवांछनीय गतिविधियों में शामिल रहते हैं, इससे अशांति/झगड़े होने की आशंका बढ़ जाती है। नागौर पुलिस पुराने बदमाश के साथ राजनीतिक पार्टी अथवा नेताओं के इर्द-गिर्द रहने वालों की भी कुण्डली खंगाल रही है, जो कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए घातक हो सकते हैं।
पुलिस पकड़े तो कैसे
जानकार सूत्रों के अनुसार आदर्श आचार संहिता लग गई। पहले ही नफरी कम और उस पर चुनावी काम का बोझ अलग। अपने हिस्से की जांच पूरी करने में ही यहां महीनों लग जाते हैं। वैसे भी पचास फीसदी वारदात के आरोपी तो स्थानीय होने के बाद भी लोकल पुलिस पकड़ नहीं पा रही। ऐसे में बाहरी राज्यों में अपराध कर नागौर में छिपे बदमाशों की तलाश हो कैसे। पहले ही स्टाफ कम और उस पर चुनावी काम का बोझ अलग। नागौर (डीडवाना-कुचामन) में छिपे अपराधियों को पकडऩा पुलिस के बूते के बाहर दिखाई देता है।
