एक नवम्बर को मनाई जाएगी करवा चौथएक नवम्बर को मनाई जाएगी करवा चौथकुचेरा क्षेत्र के सबसे बड़े गोचर में हरिणों की चहल पहल बढ़ने लगी है। वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र में खेतों की मेड़ पर तारबंदी, जाली व झटका मशीन के साथ ही शिकारी श्वानों के बढ़ते आतंक के कारण दुर्लभ कृष्ण मृग अपना कुनबा बचाए रखने के लिए पलायन को मजबूर है। वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र के थला की ढाणी, चरणावास, डारा की ढाणी, इग्यासनी, बिचपुड़ी, मालास, चकढाणी, राजोद, सूर्यनगर, विष्णुनगर, पूनास, मालां की ढाणी, बुटाटी, सिंधलास, आकेली बी क्षेत्र से कृष्ण मृग पलायन कर गोचर तक पहुंचने लगे हैं। वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार हरिण व अन्य वन्यजीवों का क्षेत्र से पलायन का मुख्य कारण शिकारी श्वानों का बढ़ता आतंक है। दर्जनों शिकारी श्वान टोली में वन्यजीव हरिण, मोर, नीलगाय के बच्चों को शिकार बना लेते हैं। इससे हरिण व अन्य वन्यजीव के अस्तित्व को खतरा हो गया है।
चहलकदमी से वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह
गोचर में कृष्ण मृग की चहलकदमी बढ़ने से वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह है। वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार क्षेत्र के सबसे बड़े गोचर में कृष्ण मृग के आवास बनाने से कुनबा बढ़ने व स्वच्छन्द विचरण के आसार सुकून देने वाले हैं।
इनका कहना...
गोचर में हरिणों की चहल पहल शुकून देने वाली है। अब वनविभाग व प्रशासन को यहां सुविधा व निगरानी बढ़ानी चाहिए, ताकि हरिणों का कुनबा बढ़ सके। श्रवण कुमार सेवग, वन्यजीवप्रेमी।
वन्यजीव सुरक्षित आवास की खोज में पलायन करते हैं। वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र में झटका मशीन के उपयोग व शिकारी श्वानों के आतंक से दुर्लभ कृष्ण मृग पलायन कर गोचर में पहुंच गए हैं। वनविभाग व प्रशासन शिकारी श्वानों पर अंकुश लगाए, ताकि कृष्ण मृग का अस्तित्व बच सके।
बाबूलाल विश्नोई, वन्यजीव प्रेमी
