मताधिकार के महत्व और लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी की ललक देखनी हो तो पाली और बीकानेर संभाग इसकी मिसाल हैं। करीब ढाई हजार किमी दूर गुवाहाटी हो या फिर दो हजार किमी दूर बेंगलूरु, हजारों प्रवासी राजस्थानी विधानसभा-लोकसभा से लेकर नगरीय निकाय के चुनाव तक में मतदान करने राजस्थान आते हैं। लाखों प्रवासी राजस्थानी देश के महानगरों में नौकरी या कारोबार कर रहे हैं, लेकिन माटी से इनका जुड़ाव इतना गहरा है कि मतदान करने राजस्थान जरूर आते हैं। पाली संभाग के पांच लाख और बीकानेर संभाग के करीब एक लाख वोटर बाहर हैं। इनमें से करीब पचास फीसदी से ज्यादा मतदान करने हर बार आते हैं।
मारवाड़ी व्यापारी और उद्योगपतियों का मुंबई से लेकर देश के कई राज्यों डंका है। पाली की मारवाड़ जंक्शन, बाली और सुमेरपुर विधानसभा सीट पर प्रवासी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
बीकानेर के नोखा विधानसभा क्षेत्र में परिपाटी है कि यहां से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी प्रवासियों को निमंत्रण देने अलग-अलग राज्यों में जाते हैं। प्रवासी अच्छे प्रत्याशियों की मदद भी करते हैं।
नोखा में बीस साल पहले से पंचायतराज, विधानसभा, लोकसभा चुनाव में मतदान करने मुंबई से आता हूं। हमारे और साथी भी मेरे साथ विशेष रूप से वोटिंग करने आते हैं। वोट नहीं डालेंगे तो कुछ कहने के हकदार भी नहीं रहेंगे। - अचलाराम सुथार, मुम्बई प्रवासी
अभी बड़ा त्योहार चुनाव है। नगरपालिका हो या लोकसभा-विधानसभा चुनाव, सभी में वोटर के रूप में खुद की जिम्मेदारी को अहम मानते हुए पूरा परिवार लक्ष्मणगढ़ वोट डालने आता है। - श्रीकुमार लखोटिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष, शेखावाटी नागरिक परिषद
