राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र माधोराजपुरा को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्नत करने पर क्षेत्रवासियों ने अनुभवी चिकित्सकों के साथ बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का सपना संजोया था। लेकिन क्रमोन्नति के करीब दो साल बाद भी भवन के अभाव में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पूर्व की भांति प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन में ही संचालित हो रहा है। हालात ये है कि सीएचसी में नियुक्त चारों चिकित्सकों को एक ही कमरे में बैठना पड़ता है तो वार्ड में भी पूर्व की भांति महज छह बेड़ लगे हैं। छह से अधिक प्रसूताओं के होने पर बरामदे में ही वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है। जबकि सीएचसी के नियमों के तहत यहां तीस बेड उपलब्ध होने चाहिए। इतना ही नहीं अपर्याप्त स्टोर के कारण नि:शुल्क दवाइयों को भी बरामदे में रखना पड़ता है। अभावों के चलते यहां आने वाले मरीज अब भी इसे पीएचसी ही मान बैठते हैं। मरीजों का कहना है कि बदलने के नाम पर महज पीएचसी के स्थान पर सीएचसी लिख दिया, सुविधाओं की दृष्टि से हालात पीएचसी जैसे ही हैं। छह से अधिक प्रसूताओं के होने पर बरामदे में ही वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है। जबकि सीएचसी के नियमों के तहत यहां तीस बेड उपलब्ध होने चाहिए। इतना ही नहीं अपर्याप्त स्टोर के कारण नि:शुल्क दवाइयों को भी बरामदे में रखना पड़ता है।अभावों के चलते यहां आने वाले मरीज अब भी इसे पीएचसी ही मान बैठते हैं।
ये पद हैं रिक्त
चिकित्साधिकारी प्रभारी के मुताबिक सीएचसी में एक चिकित्सक के साथ एक सीनियर नर्सिंग ऑफिसर, दो नर्सिंग ऑफिसर, एक फार्मासिस्ट व तीन वार्ड ब्वॉय के पद रिक्त चल रहे हैं। बता दें कि कस्बे सहित बीची, चांदमाकला, भांकरोटा, डाबिच, दोसरा, डिडावता, झाड़ला, पीपला ग्राम पंचायत क्षेत्र के गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उपचार के लिए यहां आते हैं।
