Wed, 07 22, 2026
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चंद्रयान 3 के फिर फिर जागने की उम्मीद:

14 दिनों की रात के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुवीय से पर हिस्से पर एक बार फिर सूरज की रोशनी पहुंचने लगी है

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बेंगलुरु एजेंसी चंद्रयान 3 के लैंडर और रोवर के एक बार फिर जागने की उम्मीद है 14 दिनों की रात के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुवीय से पर हिस्से पर एक बार फिर सूरज की रोशनी पहुंचने लगी है इसरो 22 सितंबर को यहां स्लीप मोड पर डाले गए विक्रम लैंडर और और प्रज्ञान रोवर से संपर्क करने की कोशिश करेगा इसरो के मुताबिक लैंडर और रोवर के सोलर पैनल पर सूरज की रोशनी पडते ही यह काम करना शुरू कर सकते हैं इसरो ने 4 सितंबर को विक्रम लैंडर को स्लीप मोड में डाल दिया था इससे पहले 2 सितंबर को  प्रज्ञान रोवर को  स्लीप मोड में डाला गया था लेंडर के स्लीप मोड में जाने से पहले  पेलोडर्स के जरिए चांद पर नई जगह की जांच पड़ताल की थी उसके बाद ही विक्रम लैंडर को सोने का कमांड दिया गया फिलहाल सारे पेलोडर्स बंद है सिर्फ रिसीवर ऑन है ताकि वह बेंगलुरु से कमांड लेकर फिर से कम कर सके चंद्रयान-3 मिशन 14 दोनों का ही है  ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर धरती के 14 दिन के बराबर एक दिन होता है इतनी ही बड़ी रात होती है यानी चंद्रमा पर 14 दिन तक रात और 14 दिन तक उजाला रहता है रात के दौरान चांद के साउथ पोल पर तापमान माइंस 238 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और रोवर लैंडर सूर्य की रोशनी में तो पावर जेनरेट कर सकते हैं लेकिन रात होने पर पावर जेनरेशन प्रोसेस रुक जाएगी पावर जेनरेशन नहीं होगा तो इलेक्ट्रॉनिक्स भयंकर ठंड को  जेल नहीं पाएंगे और खराब हो जाएंगे

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